Ram Mandir Row: कांग्रेस का BJP-RSS पर बड़ा हमला, बोली- धर्म को सत्ता का जरिया बनाया

Ram Mandir Row:  अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सोमवार, 6 जुलाई को कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर कड़ा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस वार्ता के दौरान इन चोरी की घटनाओं को एक ‘खास पैटर्न’ करार दिया है। उनका आरोप है कि बीजेपी और आरएसएस के लिए धर्म केवल सत्ता हासिल करने और अपने करीबियों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने का एक माध्यम मात्र है। कांग्रेस नेता ने आरएसएस की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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जवाबदेही की मांग: आरएसएस की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल

पवन खेड़ा ने आरएसएस से तीखे सवाल करते हुए पूछा कि क्या यही कारण है कि वे स्वयं को पंजीकृत (register) नहीं कराना चाहते? कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जवाबदेही से बचने के लिए ही ये संगठन अपनी अकाउंट बुक्स को सार्वजनिक करने से कतराते हैं। खेड़ा के अनुसार, मंदिर में हो रही चोरी और उसके प्रबंधन में पारदर्शिता का अभाव एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। उन्होंने आरएसएस की कार्यप्रणाली पर प्रहार करते हुए कहा कि जब कोई संगठन जनता के सामने अपनी वित्तीय स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तो उस पर संदेह होना स्वाभाविक है। कांग्रेस का मानना है कि इस ‘प्रोजेक्ट’ में डकैती हो रही है और इसकी नैतिक जिम्मेदारी उन लोगों पर है, जो इसके सर्वेसर्वा हैं।

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अयोध्या मंदिर यात्रा पर कांग्रेस का रुख: इसे बीजेपी का प्रोजेक्ट बताया

जब पवन खेड़ा से यह पूछा गया कि क्या कांग्रेस नेता राम मंदिर का दौरा करेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां जाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेता वहां जा चुके हैं और दान भी दिया है, लेकिन इससे ट्रस्ट की समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला। कांग्रेस ने जोर देकर कहा कि यह पूरा मामला पूरी तरह से ‘बीजेपी और आरएसएस का प्रोजेक्ट’ है और इसकी विफलताओं के लिए वे ही जिम्मेदार हैं। उनके अनुसार, मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन में चल रही गड़बड़ियों से किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है; यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है जहाँ न तो कोई पारदर्शिता है और न ही कोई जवाबदेही।

ट्रस्ट की आंतरिक खींचतान: कोषाध्यक्ष के बयान से बढ़ी हलचल

मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि का बयान इस विवाद में एक नया मोड़ ले आया है। उन्होंने चढ़ावा चोरी के मामले में खुद को पूरी तरह अलग करते हुए कहा कि दान की राशि की गिनती की प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया की देखरेख स्थानीय ट्रस्टी ही करते थे। यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी उच्च-स्तरीय बैठक से ठीक एक दिन पहले आया है। कोषाध्यक्ष की यह सफाई ट्रस्ट के भीतर मची आंतरिक खींचतान और जिम्मेदारी तय करने को लेकर जारी विवाद को और अधिक हवा दे रही है। अब सभी की निगाहें ट्रस्ट की बैठक पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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Chandan Das

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