Hormuz Strait Attack : ओमान के पास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर मिसाइल हमले की खबर से हड़कंप मच गया है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने पुष्टि की है कि लिमाह के पास यह हमला तब हुआ जब टैंकर दक्षिण की ओर ओमान की खाड़ी की तरफ बढ़ रहा था। मिसाइल सीधे टैंकर के बाईं ओर जाकर लगी, जिससे उसमें भीषण आग लग गई। गनीमत यह रही कि इस हमले से कोई पर्यावरणीय क्षति नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने वैश्विक व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, अधिकारी मामले की तहकीकात में जुटे हैं और अभी तक किसी भी समूह या देश ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

ईरान और पश्चिमी शक्तियों के बीच बढ़ता तनाव
यद्यपि इस हमले को लेकर अभी तक आधिकारिक रूप से कोई आरोपी सामने नहीं आया है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में इस क्षेत्र में जहाजों पर हुए हमलों के बाद ईरान पर संदेह की सुइयां घूम रही हैं। इसी बीच, ईरान ने ब्रिटेन और फ्रांस को कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के संयुक्त बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य बाहरी शक्तियों के लिए सैन्य शक्ति प्रदर्शन का केंद्र नहीं है।

ईरान का दावा: ‘हम ही हैं क्षेत्र के सुरक्षा गारंटर’
गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से दो टूक कहा कि ईरान इस जलमार्ग की सुरक्षा का असली जिम्मेदार और ‘गारंटर’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बाहरी शक्तियां इस क्षेत्र में कोई भी सैन्य गतिविधि या हस्तक्षेप करती हैं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ईरान का तर्क है कि होर्मुज की सुरक्षा केवल तटीय देशों की जिम्मेदारी है और किसी भी बाहरी सैन्य मिशन का इस क्षेत्र में प्रवेश करना संकट को न्यौता देने जैसा है। उनकी यह टिप्पणी इस क्षेत्र में व्याप्त कूटनीतिक तनाव को दर्शाती है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए होर्मुज का महत्व
दूसरी ओर, ब्रिटेन और फ्रांस ने इस मार्ग को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा करार दिया है। दोनों देशों ने ओमान के साथ मिलकर अपने समुद्री क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है। पश्चिमी देशों ने आवश्यकता पड़ने पर एक बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन तैनात करने का भी संकेत दिया है, ताकि नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) को बहाल रखा जा सके। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दिया है।












