Supercomputer Cost: करोड़ों की कीमत और भारी बिजली खपत, जानिए कैसे चलता है सुपर कंप्यूटर

Supercomputer Cost: आज के डिजिटल युग में, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सटीक मौसम पूर्वानुमान, जीवन रक्षक दवाओं की खोज और अंतरिक्ष अन्वेषण जैसे क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहां सुपर कंप्यूटर की भूमिका अनिवार्य हो गई है। देखने में यह भले ही किसी बड़े सर्वर रूम जैसा लगे, लेकिन इसकी कार्यक्षमता सामान्य कंप्यूटरों से लाखों-करोड़ों गुना अधिक होती है। सुपर कंप्यूटर विशेष रूप से उन जटिल गणनाओं और विशाल डेटा विश्लेषण (Big Data Analysis) के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं, जिन्हें सामान्य कंप्यूटरों द्वारा हल करने में दशकों का समय लग सकता है। यही कारण है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक शोध संस्थान और सरकारी एजेंसियां अपनी अनुसंधान परियोजनाओं के लिए सुपर कंप्यूटर पर ही निर्भर हैं।

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सामान्य कंप्यूटर से कितना अलग और पावरफुल है?

एक आम कंप्यूटर और सुपर कंप्यूटर के बीच का मुख्य अंतर ‘पैरेलल प्रोसेसिंग’ (Parallel Processing) का है। सामान्य कंप्यूटर में प्रोसेसर सीमित कार्यों को क्रमबद्ध तरीके से करते हैं, जबकि सुपर कंप्यूटर में हजारों या लाखों CPU कोर एक साथ मिलकर एक ही जटिल समस्या पर काम करते हैं। यह तकनीक इसे अभूतपूर्व गति प्रदान करती है। सुपर कंप्यूटर की कार्यक्षमता को ‘फ्लॉप्स’ (FLOPS) में मापा जाता है, जो इसकी डेटा प्रोसेस करने की गति को दर्शाता है। जलवायु परिवर्तन पर शोध से लेकर जटिल AI मॉडल को ट्रेन करने तक, यह तकनीक डेटा के सागर को पलक झपकते ही विश्लेषित कर सकती है।

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कीमत का गणित: छोटे सिस्टम से लेकर करोड़ों के प्रोजेक्ट्स तक

सुपर कंप्यूटर की लागत उसकी उपयोगिता, प्रोसेसिंग क्षमता और हार्डवेयर तकनीक के आधार पर तय होती है। यदि हम शुरुआती स्तर की बात करें, तो AI और मशीन लर्निंग के छोटे कार्य करने वाले सिस्टम, जैसे ‘NVIDIA Jetson Orin Nano’, करीब 45,000 से 50,000 रुपये में उपलब्ध हैं। वहीं, शोध कार्यों के लिए मध्यम स्तर के AI सुपर कंप्यूटर 2.5 लाख से 5.5 लाख रुपये तक के आते हैं। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए इनका बजट करोड़ों में होता है। उदाहरण के तौर पर, भारत के ‘परम रुद्र’ जैसे उन्नत स्वदेशी सुपर कंप्यूटरों के निर्माण पर लगभग 130 करोड़ रुपये की लागत आई है। परमाणु अनुसंधान और बड़े पैमाने के डेटा केंद्रों वाले सुपर कंप्यूटरों की कीमत 25 करोड़ रुपये से लेकर 130 करोड़ रुपये या उससे भी अधिक हो सकती है।

ऊर्जा की भारी खपत: क्या है एक घंटे का खर्च?

सुपर कंप्यूटर की अपार गति और शक्ति के पीछे भारी बिजली की खपत का रहस्य छिपा है। इन्हें चलाने के लिए औद्योगिक स्तर के बिजली कनेक्शन की आवश्यकता होती है। एक सामान्य शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर एक घंटे में लगभग 20 से 30 मेगावाट (MW) बिजली खर्च कर सकता है। उदाहरण के रूप में, विश्व के सबसे तेज सुपर कंप्यूटरों में गिने जाने वाले ‘फ्रंटियर’ (Frontier) की खपत 29 मेगावाट प्रति घंटा है, जबकि अत्याधुनिक ‘कोलोसस’ (Colossus) सुपर कंप्यूटर अधिकतम क्षमता पर 280 मेगावाट तक बिजली खींच सकता है। इसी तरह, ‘ऑरोरा’ (Aurora) लगभग 38.6 मेगावाट और जापान का ‘के’ (K) सुपर कंप्यूटर लगभग 9.8 मेगावाट बिजली का उपभोग करता है। यह ऊर्जा की खपत न केवल इन मशीनों की विशालता को दर्शाती है, बल्कि इनके संचालन में आने वाले भारी खर्च का भी संकेत देती है।

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Chandan Das

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