Iran US Tensions : मध्य-पूर्व में एक बार फिर युद्ध के बादल गहरा गए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान द्वारा किए जा रहे हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ न केवल नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) को और कड़ा कर दिया है, बल्कि अपने हवाई हमलों (Air Strikes) को भी तीव्र कर दिया है। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान ईरान के भीतर सात सैनिकों के मारे जाने और 260 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। ईरानी अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि अमेरिकी विमानों ने देश की सेना की एक महत्वपूर्ण बैरक को निशाना बनाया है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक कूटनीति के पटल पर हलचल मचा दी है और पूरी दुनिया अब इस क्षेत्र में संभावित बड़े संघर्ष को लेकर आशंकित है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का सैन्य अभियान और ईरानी प्रतिक्रिया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, सात घंटे तक चले इस गहन सैन्य अभियान में ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को ध्वस्त किया गया। इनमें सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित 388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड की बैरक मुख्य रूप से शामिल थी। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी अपनी आक्रामक रणनीति अपनाते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में मिसाइलें और ड्रोन दागे। जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उन्होंने अपनी सीमा में प्रवेश करने वाली तीन मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। ईरान की इस जवाबी कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि वह किसी भी स्थिति में झुकने को तैयार नहीं है।

टूटा अंतरिम समझौता और विफल हुई कूटनीति
कुछ समय पूर्व ही अप्रैल में अमेरिका ने ईरान पर नाकाबंदी लगाई थी, जिसे पिछले महीने एक अंतरिम समझौते के बाद हटा लिया गया था। इस समझौते का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए 60 दिन की शांति अवधि तय करना था। लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य झड़पों ने इस शांति प्रक्रिया को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। वाशिंगटन इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रखने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन ईरान के कड़े रुख ने इस लक्ष्य को हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
एनर्जी एक्सपोर्ट रोकने की धमकी और वैश्विक ऊर्जा संकट
तनाव के चरम पर होने के बीच, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि यदि नाकाबंदी जारी रही, तो वे मध्य-पूर्व से होने वाले सभी ऊर्जा निर्यात (Energy Export) को रोक देंगे। ईरान का कहना है कि इस क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात ‘सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए नहीं’। दूसरी ओर, अमेरिकी नेतृत्व ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि बेहतर होगा कि वे कूटनीतिक समझौते की मेज पर लौट आएं, अन्यथा इसके परिणाम अत्यंत भयावह होंगे। दोनों देशों के बीच युद्ध की दहलीज पर खड़ी यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी एक गंभीर संकट का संकेत है।
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