Tirupati Temple : तिरुपति मंदिर में रिकॉर्ड दान, नए नियमों से पहले श्रद्धालुओं ने चढ़ाए 97 करोड़ रुपये

Tirupati Temple : विश्व के सबसे धनी और आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक, तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रबंधन निकाय ‘तिरुमला तिरुपति देवस्थानम’ (TTD) को एक ही दिन में अभूतपूर्व दान प्राप्त हुआ है। टीटीडी की दानदाता नीति (डोनर पॉलिसी) में होने वाले संशोधनों के लागू होने से ठीक पहले, मंगलवार को देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने दान की झड़ी लगा दी। आंकड़ों के अनुसार, मंदिर को एक दिन में 96.98 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राशि दान के रूप में मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि नीति में बदलाव और भविष्य में वीआईपी दर्शन की सुविधाओं में कटौती की आहट के कारण, पुराने नियमों के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में भक्तों ने स्वेच्छा से आगे आकर ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से अपना योगदान दिया।

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दानदाताओं का विस्तृत विवरण और भारी योगदान

TTD द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को कुल 2,460 दानदाताओं ने मंदिर के विभिन्न ट्रस्टों में अपनी आस्था समर्पित की। इनमें से 2,354 श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई, जबकि 106 दानदाताओं ने ऑफलाइन माध्यम से दान दिया। योगदान की श्रेणी पर गौर करें तो 1,212 लोगों ने 1 लाख से 10 लाख रुपये के बीच दान दिया, वहीं 1,246 भक्तों ने 10 लाख से 25 लाख रुपये की बड़ी राशि समर्पित की। इतना ही नहीं, दो अत्यंत उदार दानदाताओं ने तो 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेंट की। यह भारी-भरकम दान तिरुपति बालाजी के प्रति भक्तों की अटूट निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है।

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डोनर पॉलिसी में बदलाव क्यों और कैसे?

टीटीडी के नवनियुक्त चेयरमैन बी.आर. नायडू ने स्पष्ट किया कि दर्शनार्थियों की लगातार बढ़ती संख्या और वीआईपी दर्शन प्रबंधन में आ रही चुनौतियों को देखते हुए नीति में सुधार अनिवार्य था। कार्यकारी अधिकारी मुद्ददा रविचंद्र ने बताया कि नई नीति का मुख्य उद्देश्य वीआईपी विशेषाधिकारों को तर्कसंगत बनाना है, ताकि आम भक्तों के लिए दर्शन के अवसर बढ़ सकें। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये नए नियम केवल भविष्य में मिलने वाले दानों पर लागू होंगे। पहले से पंजीकृत लगभग 1.97 लाख दानदाताओं और संस्थानों को मिलने वाले पुराने लाभ यथावत बने रहेंगे, जिससे पुराने भक्तों के हितों का भी पूरा संरक्षण किया गया है।

संशोधित नीति: पारदर्शिता और नई श्रेणी व्यवस्था

नई नीति के तहत पुरानी ‘स्लैब सिस्टम’ को समाप्त कर दानदाताओं को उनकी सटीक दान राशि के आधार पर चार स्पष्ट श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इन श्रेणियों के अंतर्गत दानदाताओं को विशेष प्रवेश दर्शन, सुपाथम प्रवेश, ब्रेक दर्शन, सुप्रभातम सेवा और कल्याणोत्सवम जैसी सेवाओं में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, उन्हें आवास की सुविधा, लड्डू, रेशमी वस्त्र और सोने-चांदी के सिक्के जैसे उपहार भी प्राप्त होंगे। यह विशेषाधिकार व्यक्तिगत दानदाताओं के लिए 20 वर्ष और संस्थानों के लिए 15 वर्ष तक मान्य रहेंगे। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘डोनर मैनेजमेंट सिस्टम’ के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही, बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी वीआईपी सुविधा का व्यावसायिक या गलत इस्तेमाल पाया जाता है, तो उसे तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।

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