Congress Meeting : संसद के आगामी मानसून सत्र के शुरू होने से पहले ही दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास, 10 जनपथ पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विपक्षी दलों को एक साझा मंच पर लाकर केंद्र सरकार की नीतियों को चुनौती देना है। कांग्रेस का स्पष्ट लक्ष्य यह है कि विपक्ष को एकजुट कर सरकार के विधायी एजेंडे, विशेष रूप से सदन में दो-तिहाई बहुमत की मंशा पर अंकुश लगाया जाए। सत्र के दौरान विपक्ष पेपर लीक, इथेनॉल मिश्रण (E-20) और हालिया अन्य विवादित मुद्दों को लेकर सरकार को सदन के भीतर और बाहर घेरने की पूरी तैयारी कर रहा है।

विपक्ष की एकजुटता और प्रमुख नेताओं की सक्रियता
इस रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए कांग्रेस ने कमर कस ली है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हैं, ने राहुल गांधी के साथ मिलकर मोर्चा संभाला है। विपक्षी एकता को और मजबूत करने के लिए द्रमुक (DMK) सहित अन्य सहयोगी दलों को साथ लाने की कवायद तेज कर दी गई है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। यह सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की चुनावी जीत के बाद आयोजित हो रहा है, जिससे राजनीतिक समीकरणों में आए बदलावों का असर सदन में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

विपक्षी दलों में टूट और सत्र में हंगामे के आसार
आगामी सत्र के काफी हंगामेदार रहने की प्रबल संभावना है। हाल के दिनों में कई विपक्षी दलों में हुई टूट-फूट और राजनीतिक उथल-पुथल ने सदन के माहौल को गरमा दिया है। तृणमूल कांग्रेस में विधानसभा चुनावों के बाद मचे आंतरिक घमासान और शिवसेना (UBT) व आम आदमी पार्टी के सांसदों के दल बदलने जैसी घटनाओं ने विपक्ष की एकजुटता पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। इन तमाम राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच, विपक्षी खेमा अपनी खोई हुई ताकत को फिर से संगठित करने का प्रयास कर रहा है, ताकि सरकार के विधायी लक्ष्यों को चुनौती दी जा सके।
सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक: विधायी एजेंडे पर चर्चा
संसदीय परंपरा के अनुरूप, केंद्र सरकार ने मानसून सत्र की औपचारिक शुरुआत से ठीक एक दिन पहले, यानी 19 जुलाई को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक सुबह 11 बजे आयोजित होगी, जिसमें सरकार अपना विधायी एजेंडा विपक्षी दलों के समक्ष रखेगी। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर आपसी सहमति बनाना है, ताकि सदन की कार्यवाही बिना किसी व्यवधान के सुचारू रूप से संचालित हो सके। एक तरफ जहां सरकार इस बैठक के माध्यम से सत्र को शांतिपूर्ण तरीके से चलाने का प्रयास करेगी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष अपने उन मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से रखने की योजना बना रहा है, जिन पर वे सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर चुके हैं।
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