US Senate Bill: अमेरिकी सीनेट में नया बिल, रूसी तेल खरीदने पर भारत समेत 5 देशों पर 100% शुल्क का प्रस्ताव

US Senate Bill:  अमेरिकी कांग्रेस के उच्च सदन, सीनेट में एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य रूस के ऊर्जा राजस्व पर कड़े प्रतिबंध लगाना है। इस विधेयक को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम प्रतिबंध रूस अधिनियम 2026’ का नाम दिया गया है, जो दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम को एक श्रद्धांजलि है। इस कानून का मुख्य लक्ष्य रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस आर्थिक शक्ति को कमजोर करना है, जिसका उपयोग वे यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को वित्तपोषित करने के लिए कर रहे हैं। विधेयक को 60 से अधिक सीनेटरों का समर्थन प्राप्त है, जो इसकी गंभीरता और द्विदलीय सहमति को दर्शाता है। यदि यह कानून पारित हो जाता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार और रूस के साथ व्यापारिक संबंधों में बड़े बदलाव ला सकता है।

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भारत और चीन समेत पांच देशों पर शुल्क का प्रस्ताव

इस प्रस्तावित कानून के मसौदे में रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच वैश्विक खरीदारों को लक्षित किया गया है। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के अनुसार, इस विधेयक के दायरे में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल हैं। इन देशों से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाने का प्रावधान रखा गया है। विधेयक का उद्देश्य केवल रूस की कमाई को रोकना ही नहीं, बल्कि उन देशों पर भी दबाव बनाना है जो रूसी तेल पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद कर रहे हैं। हालांकि, विधेयक में लचीलापन भी रखा गया है; अमेरिका का व्यापार प्रतिनिधित्व हर 180 दिनों में इन खरीदारों की समीक्षा करेगा और उनकी खरीदारी की प्रवृत्ति के आधार पर शुल्क दरों में समायोजन किया जाएगा।

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यूरोपीय देशों और विशिष्ट क्षेत्रों के लिए विशेष छूट

विधेयक में सभी देशों के लिए समान कठोर नियम नहीं हैं। इसमें उन यूरोपीय देशों को छूट दी गई है जो रूस से होने वाले कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं और इस निर्भरता को कम करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए भी कुछ अपवाद शामिल किए गए हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका द्वारा अपने परमाणु रिएक्टरों के संचालन के लिए आवश्यक रूसी यूरेनियम की खरीद को इस शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया है। साथ ही, परमाणु और अंतरिक्ष क्षेत्र में अमेरिका और रूस के बीच होने वाले द्विपक्षीय सहयोग वाली गतिविधियों को भी इस कानून के प्रभाव से मुक्त रखा गया है।

विधेयक के प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां

यह विधेयक रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की अमेरिकी रणनीति का एक हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि इस विधेयक के शुरुआती मसौदे में शुल्क की दर 500 प्रतिशत तक रखने का प्रस्ताव था, जिसे बाद में घटाकर 100 प्रतिशत किया गया। यह बदलाव संभवतः वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की चिंता को दर्शाता है। हालांकि, भारत और चीन जैसे देशों पर इस तरह के शुल्क का असर काफी व्यापक हो सकता है। यह विधेयक न केवल रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया तनाव भी पैदा कर सकता है। सीनेट में इस पर होने वाली आगामी बहस यह तय करेगी कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और रूस के प्रति पश्चिमी देशों का रुख आने वाले दिनों में कैसा रहने वाला है।

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Chandan Das

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