Delhi Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुजफ्फरनगर से फेसबुक लाइव के माध्यम से कार्यकर्ताओं और आम जनता को संबोधित करते हुए टिकैत ने सरकार को चेतावनी दी कि युवाओं की आवाज को दबाना बंद करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक देश में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। टिकैत ने सरकार से अपील की कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन पर ध्यान दिया जाए, क्योंकि ये मुद्दे देश के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़े हैं।

भूख हड़ताल पर पुलिसिया कार्रवाई को बताया अनुचित
प्रदर्शन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को पुलिस द्वारा जबरन हिरासत में लेने और अस्पताल ले जाने की घटना पर टिकैत ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन को छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता थी, तो इसे बातचीत के माध्यम से हल किया जा सकता था। धरने में जबरन प्रवेश करके युवाओं को उठाकर ले जाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। टिकैत ने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान यूनियन इस प्रकार की दमनकारी कार्रवाई का कड़ा विरोध करती है। उनके अनुसार, प्रशासन को दमन के बजाय संवाद का मार्ग अपनाना चाहिए था ताकि समस्या का समाधान निकल सके।

किसान पंचायत में गूंजेगा युवाओं का मुद्दा, SKM का मिला समर्थन
राकेश टिकैत ने घोषणा की है कि 21 जुलाई को आयोजित होने वाली किसान पंचायत में इन युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) इस पूरे आंदोलन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज का पूरी तरह समर्थन करता है। टिकैत ने स्पष्ट किया कि किसान और छात्र दोनों ही समाज के वे स्तंभ हैं जो देश के ज्वलंत मुद्दों को उठाते रहे हैं। आगामी किसान पंचायत में युवाओं के आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी, ताकि सरकार पर उनकी मांगों को पूरा करने का दबाव बनाया जा सके।
शांति और संयम की अपील: असामाजिक तत्वों से सावधान रहने की चेतावनी
आंदोलन की संवेदनशीलता को देखते हुए राकेश टिकैत ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम पूरी तरह से अनुशासित और अहिंसक तरीके से संपन्न होना चाहिए। उन्होंने चिंता जाहिर की कि ऐसे आंदोलनों का लाभ उठाने के लिए कुछ असामाजिक तत्व और बाहरी लोग घुसपैठ कर सकते हैं, जो आंदोलन को भटकाने या हिंसा फैलाने का प्रयास करेंगे। टिकैत ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे अपने आसपास ऐसे तत्वों पर नजर रखें और उनकी पहचान कर उन्हें आंदोलन से दूर रखें। उन्होंने दोहराया कि एकता और शांति ही इस संघर्ष की असली ताकत है, जिसे किसी भी कीमत पर बनाए रखना अनिवार्य है।
Read More : Nelson Mandela Day 2026: 67 मिनट सेवा क्यों की जाती है? जानिए मंडेला से इसका संबंध












