Student Protest: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा और कथित पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है। समय के साथ यह आंदोलन व्यापक स्वरूप लेता जा रहा है और अब इसे विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों का समर्थन भी मिलने लगा है। छात्रों का कहना है कि वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। इसी बीच आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी छात्रों की चिंताओं पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

श्री श्री रविशंकर ने संवाद और संवेदनशीलता पर दिया जोर
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने छात्रों के आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के युवाओं की आवाज को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा किसी भी देश का भविष्य होते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। उनके अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में संवाद की कमी किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है और सभी संबंधित पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

जंतर-मंतर पहुंचे शशि थरूर, छात्रों से की मुलाकात
कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी जंतर-मंतर पहुंचे, जहां उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत की और उनकी बातों को सुना। इस दौरान उन्होंने छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद और चर्चा के माध्यम से होना चाहिए।
राहुल गांधी की हिरासत पर जताई आपत्ति
शशि थरूर ने प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन घटनाओं की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ इस प्रकार की कार्रवाई चिंता का विषय है। उनके अनुसार, संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनहित से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
सरकार से पूछा संवेदनशीलता का सवाल
पत्रकारों से बातचीत के दौरान थरूर ने सवाल उठाया कि जब छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं, तो सरकार को उनके प्रति अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखने के बजाय संवाद और समाधान के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, छात्रों की बात सुनना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जवाबदेही और संवाद पर दिया जोर
शशि थरूर ने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और पारदर्शिता के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अपनी जवाबदेही निभाते हुए छात्रों की चिंताओं का समाधान खोजने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करते हैं, इसलिए इन पर गंभीर और रचनात्मक चर्चा आवश्यक है।
आंदोलन को मिल रहा व्यापक सामाजिक समर्थन
जंतर-मंतर पर जारी इस आंदोलन को अब केवल छात्रों का प्रदर्शन नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे समाज और राजनीति के विभिन्न वर्गों का समर्थन भी मिलने लगा है। विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट है कि शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुके हैं। आने वाले दिनों में सरकार, छात्रों और संबंधित पक्षों के बीच होने वाले संवाद पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि इस आंदोलन का परिणाम शिक्षा व्यवस्था से जुड़े भविष्य के फैसलों को प्रभावित कर सकता है।
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