Public Examinations Act : देशभर में परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) संशोधन बिल, 2026 को आगामी सोमवार को देश की लोकसभा में आधिकारिक तौर पर पेश किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण और कड़े बिल को सदन में पेश करने की पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को सौंपी गई है। निर्धारित लेजिस्लेटिव बिजनेस एजेंडा के अनुसार, वे 27 जुलाई को लोकसभा में इस नए संशोधन विधेयक को रखेंगे। इसके साथ ही, इस अहम बिल को संसद के दोनों सदनों से सफलतापूर्वक पास कराने की पूरी जिम्मेदारी भी डॉ. जितेंद्र सिंह के कंधों पर ही होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश के बाद आया यह बड़ा फैसला
आपको बता दें कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते गुरुवार की देर रात एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर देश की जनता को यह जानकारी दी थी कि केंद्र सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक और धांधली को पूरी तरह से रोकने के लिए एक बेहद सख्त और नया कानून लाने जा रही है। प्रधानमंत्री के उस संदेश के ठीक बाद, शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस नए संशोधन विधेयक के सभी कड़े प्रावधानों को औपचारिक रूप से अपनी मंजूरी दे दी है। सरकार की पूरी कोशिश है कि इस नए कानून को जल्द से जल्द संसद से पास करा लिया जाए।

10 साल की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान
प्रतियोगियों परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य प्रकार की धांधलियों पर नकेल कसने के लिए लाए गए इस नए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ में बेहद कड़े प्रावधान तय किए गए हैं। इस कानून के तहत यदि कोई भी व्यक्ति या संगठित गिरोह परीक्षा में गड़बड़ी करते हुए पाया जाता है, तो उसमें कम से कम 10 साल तक की लंबी कैद की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, दोषियों पर 1 करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा आपराधिक कृत्य करने की हिम्मत न जुटा सके।
देश भर में उठे भारी विरोध के बाद सरकार का कदम
यह पूरा बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम नीट-यूजी परीक्षा 2026 के पेपर लीक होने के बाद उपजे देशव्यापी विवाद और भारी हंगामे के बाद सामने आया है। नीट परीक्षा लीक होने के बाद कई तनावग्रस्त छात्रों द्वारा उठाए गए चरम कदमों के चलते देश भर में रोष फैल गया था। हालांकि केंद्र सरकार ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए दोबारा परीक्षा का आयोजन किया और तय समय के भीतर ही परिणाम भी जारी कर दिए, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने सरकार के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से गरमाई राजनीति
समय के साथ जंतर-मंतर पर चल रहा यह प्रदर्शन देश भर में काफी बड़ा और व्यापक रूप लेता चला गया। स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब प्रसिद्ध पर्यावरणविद और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने इस मुद्दे पर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिसके बाद देश भर से भारी संख्या में छात्र और युवा उनसे आकर जुड़ते चले गए। जब दिल्ली पुलिस ने स्वास्थ्य बिगड़ने पर सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल में शिफ्ट किया, तो विरोध प्रदर्शन स्थल पर भीड़ और ज्यादा बेकाबू होकर उमड़ पड़ी।
ऐतिहासिक संघर्ष के बाद उठा कड़ा कदम
गत 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिसिया लाठीचार्ज की घटना के बाद यह पूरा विवाद देश के हर कोने में सुलग उठा और राष्ट्रव्यापी विरोध शुरू हो गया। इस बढ़ते हुए अभूतपूर्व राजनीतिक और सामाजिक दबाव के आगे आखिरकार केंद्र सरकार को झुकना पड़ा और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया। इन सभी उथल-पुथल भरे हालातों के बीच अब सरकार इस नए और सख्त कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से दुरुस्त और सुरक्षित करने की पुख्ता तैयारी में जुट गई है।











