Neha Bora Statement: शैक्षिक व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल करने वाली ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा के लिए माफी मांगने या उसकी निंदा करने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इस विवाद को जानबूझकर मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए उछाला जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन की प्रमुख मांगें अब भी बरकरार हैं और प्रदर्शनकारी अपने अभियान को जारी रखेंगे।

पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
नेहा बोरा ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि सुरक्षा बलों के पास कथित रूप से पैलेट गन और कीलों वाली लाठियां क्यों थीं। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों को लगी चोटों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि बल प्रयोग किन परिस्थितियों में किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य सिर्फ जवाबदेही तय कराना है और इसी वजह से वे लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

भाषा के विवाद से असली मुद्दे भटकाने का आरोप
आइसा अध्यक्ष का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर हो रहा विवाद असली मुद्दों को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आंदोलन कर रहे छात्रों को ‘आतंकवादी’ बताया था या भाजपा नेता नितिन नवीन ने उन्हें ‘वायरस’ कहा था, तब उन बयानों पर समान स्तर की कार्रवाई या आलोचना क्यों नहीं हुई। नेहा बोरा के मुताबिक, यदि सभी पक्षों की भाषा पर समान मानदंड लागू नहीं किए जाते, तो केवल छात्रों को निशाना बनाना उचित नहीं कहा जा सकता।
‘हम माफी नहीं मांगेंगे’
नेहा बोरा ने कहा कि जो लोग उनसे अपशब्दों की निंदा करने या माफी मांगने की मांग कर रहे हैं, वे आंदोलन की मूल मांगों से ध्यान हटाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनका संगठन इस तरह के दबाव में आने वाला नहीं है। उनके अनुसार, छात्रों पर कथित बल प्रयोग, पैलेट गन के इस्तेमाल और पुलिस की जवाबदेही जैसे मुद्दे कहीं अधिक गंभीर हैं। उन्होंने दोहराया कि आंदोलन का उद्देश्य जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगना है, न कि भाषा के विवाद में उलझना।
अमित शाह और पुलिस आयुक्त पर कार्रवाई की मांग
आइसा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदर्शनकारी गिरफ्तार छात्रों की रिहाई के लिए प्रयास जारी रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार को हटाने की मांग भी दोहराई। उनके अनुसार, जवाबदेही केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि शीर्ष स्तर पर भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

धमकियों और सरकार के जवाब पर अलग-अलग दावे
नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि विवाद के बाद उन्हें और रुचिका सिंह को सोशल मीडिया पर बलात्कार की धमकियां मिलीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए प्रदर्शनकारियों को जाति और धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन से जुड़े छात्रों का आरोप है कि 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया और पैलेट गन का इस्तेमाल किया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि सुरक्षा बलों ने कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की थी। ऐसे में इस पूरे मामले को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।
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