Atal Statue Controversy: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद कटघोरा स्थित अटल परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। प्रारंभिक जांच में यह प्रतिमा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिमा कांस्य (ब्रॉन्ज) की बजाय पीतल (ब्रास) से निर्मित है। इसमें तांबा और जस्ता (जिंक) का मिश्रण पाया गया है, वहीं स्टेनलेस स्टील के अंश भी मिलने की बात सामने आई है। इस खुलासे के बाद कोरबा से लेकर रायपुर तक प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

करीब 30 लाख रुपये की परियोजना पर उठे सवाल
नगर पालिका परिषद कटघोरा ने वार्ड क्रमांक-2 में अटल परिसर का निर्माण कराया था, जहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापित की गई। इस पूरी परियोजना पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च किए गए। इनमें से करीब 13.60 लाख रुपये प्रतिमा निर्माण और स्थापना के लिए खर्च होने का दावा किया गया है। इसी वर्ष प्रतिमा का विधिवत अनावरण भी किया गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। प्रतिमा की सतह से पेंट उखड़ने लगा, जिसके बाद अंदर की सफेद परत दिखाई देने लगी और इसकी धातु को लेकर संदेह पैदा हुआ।

नगरीय प्रशासन विभाग ने कराई तकनीकी जांच
प्रतिमा की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मामले की जांच के आदेश दिए। विभाग की तीन सदस्यीय तकनीकी टीम दो दिन पहले कटघोरा पहुंची और प्रतिमा से धातु के नमूने एकत्र किए। जांच दल में इंजीनियर अली बख्श भी शामिल थे, जो पहले कोरबा नगर निगम में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। टीम ने प्राथमिक जांच पूरी करने के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट विभाग को सौंप दी। रिपोर्ट में संकेत मिले कि प्रतिमा कांस्य की नहीं बल्कि पीतल की बनी है और उसमें स्टेनलेस स्टील का भी उपयोग किया गया है।
सरकार की कार्रवाई, सब इंजीनियर निलंबित
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए कटघोरा नगर पालिका परिषद में पदस्थ सब इंजीनियर चंद्र प्रकाश जायसवाल को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि अटल परिसर के निर्माण और प्रतिमा स्थापना कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस परियोजना से जुड़े ठेकेदार और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि निर्माण प्रक्रिया में हुई संभावित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय की जा सके।
प्रतिमा विवाद पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
अटल प्रतिमा को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण बताते हुए राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, रणदीप सिंह सुरजेवाला और देवेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से भाजपा सरकार को निशाने पर लिया। वहीं शाम होते-होते युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अटल परिसर के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीण जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष विकास सिंह ने आरोप लगाया कि अटल बिहारी वाजपेयी जैसी महान विभूति की प्रतिमा निर्माण में गंभीर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

ठेकेदार और उप अभियंता का पक्ष भी आया सामने
इस पूरे विवाद पर नगर पालिका के उप अभियंता चंद्र प्रकाश जायसवाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रतिमा स्थापना का कार्य स्थानीय ठेकेदार मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा कराया गया था। उनके अनुसार, ठेकेदार ने कार्य पूर्ण होने के बाद गुणवत्ता परीक्षण कराने का दावा किया था और संबंधित परीक्षण रिपोर्ट भी विभाग को सौंपी थी। उन्होंने बताया कि नगर पालिका के अधिकारियों और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) द्वारा भी स्थल का निरीक्षण और परीक्षण किया गया था। अब प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद पूरे मामले की विस्तृत तकनीकी जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रतिमा निर्माण में मानकों की अनदेखी हुई या नहीं तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
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