RTI Row: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार विवाद उनकी अमेरिकी शिक्षा के खर्च और उनकी संस्था को मिलने वाली फंडिंग को लेकर खड़ा हुआ है। गुजरात के एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा उठाए गए सवालों के बाद इस मामले ने राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का रूप ले लिया है। आरोपों के बीच अभिजीत दिपके ने अपनी ओर से विस्तृत सफाई भी पेश की है।

RTI कार्यकर्ता ने उठाए आर्थिक स्रोतों पर सवाल
सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार को एक शिकायत भेजकर अभिजीत दिपके की उच्च शिक्षा के वित्तीय स्रोतों की जांच की मांग की है। शिकायत में दावा किया गया है कि दिपके के पिता भगवानराव दिपके महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे और उनका मासिक वेतन लगभग 60 से 65 हजार रुपये था। तिवारी का सवाल है कि इतनी आय के आधार पर अमेरिका जैसी महंगी शिक्षा का खर्च कैसे उठाया गया। उन्होंने इस पूरे मामले की आय से अधिक संपत्ति के दृष्टिकोण से जांच कराने की मांग की है।

महाराष्ट्र सरकार से जांच की मांग
आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की आय और उसके परिवार के खर्च के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से आग्रह किया है कि मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि विदेश में पढ़ाई के लिए धन की व्यवस्था किन स्रोतों से हुई थी। साथ ही यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
अभिजीत दिपके ने दी आरोपों पर सफाई
इन आरोपों के बाद अभिजीत दिपके ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी अमेरिका में पढ़ाई पूरी तरह पारिवारिक आय पर निर्भर नहीं थी। उन्होंने बताया कि उन्हें बोस्टन यूनिवर्सिटी से छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) प्राप्त हुई थी, जिससे उनकी शिक्षा का एक बड़ा हिस्सा पूरा हुआ। इसके अलावा शेष खर्च के लिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया था। दिपके के अनुसार, उन्होंने लगभग दो वर्षों तक अमेरिका में अध्ययन किया और पढ़ाई का खर्च वैध वित्तीय साधनों से पूरा किया।
स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन का किया उल्लेख
दिपके ने स्पष्ट किया कि विदेश में शिक्षा प्राप्त करना केवल पारिवारिक आय का परिणाम नहीं था। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण जैसी व्यवस्थाओं का लाभ लेकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यों को पूरी तरह सामने रखे बिना लगाए जा रहे हैं।

कानूनी सहायता कोष पर भी उठा विवाद
विवाद केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। हाल ही में राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे प्रदर्शनकारियों की कानूनी सहायता के लिए एक करोड़ रुपये के फंड की घोषणा की थी। इस फंड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। अमित तिवारी ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) में शिकायत दर्ज कर यह मांग की है कि इस राशि पर लागू कर नियमों की जांच की जाए।
चुनाव आयोग में भी दर्ज कराई शिकायत
आरटीआई कार्यकर्ता ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की है। उन्होंने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत राजनीतिक दल है या नहीं। उनका तर्क है कि यदि संस्था आधिकारिक रूप से राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत नहीं है, तो राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर धन जुटाने की प्रक्रिया की वैधता की जांच की जानी चाहिए।
क्राउडफंडिंग से जुटाएंगे आर्थिक सहयोग
इन विवादों के बीच अभिजीत दिपके ने भविष्य की रणनीति भी स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि CJP अपनी गतिविधियों और अभियानों के लिए आगे क्राउडफंडिंग यानी आम नागरिकों से स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग लेने की योजना पर काम करेगी। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा और प्राप्त होने वाले प्रत्येक योगदान का उचित रिकॉर्ड रखा जाएगा।
पारदर्शिता का दिया भरोसा
अभिजीत दिपके ने कहा कि संगठन जनता के सहयोग से आगे बढ़ना चाहता है और सभी वित्तीय लेनदेन को पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि संगठन की फंडिंग व्यवस्था पूरी तरह नियमों के अनुरूप होगी। वहीं दूसरी ओर, आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा उठाए गए सवालों और विभिन्न शिकायतों के बाद अब इस पूरे मामले पर संबंधित एजेंसियों की संभावित कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।












