Bastar Doctor Protest: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। संभाग के सबसे बड़े सरकारी शहीद महेंद्र कर्मा मेडिकल कॉलेज, डिमरापाल के बाहर बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर धरने पर बैठ गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से वे मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।वहीं, कांकेर शासकीय मेडिकल कॉलेज और कोमलदेव जिला अस्पताल में भी एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की कर रहे मांग
इंटर्न डॉक्टर यामिनी वर्मा ने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप के दौरान डॉक्टरों को अस्पतालों में लंबे समय तक सेवाएं देनी पड़ती हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड काफी कम है। डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर कई बार स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपा, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई निर्णय नहीं लिया गया।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से लगे अन्य राज्यों और देश के कई हिस्सों में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला मानदेय छत्तीसगढ़ की तुलना में काफी अधिक है। दूसरे राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को करीब 40 हजार से 45 हजार रुपये तक स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि यहां मिलने वाली राशि काफी कम है।

15,900 से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग
प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने वर्तमान स्टाइपेंड को बढ़ाने की मांग रखी है। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में 15 हजार 900 रुपये का मानदेय मिलता है, जिसे बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये किया जाना चाहिए।इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में उनसे 24 से 30 घंटे तक लगातार ड्यूटी ली जाती है। वे आपातकालीन वार्ड, आईसीयू, ओपीडी और कैजुअल्टी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मरीजों की देखभाल करते हैं। ऐसे में जिम्मेदारियों को देखते हुए स्टाइपेंड में बढ़ोतरी जरूरी है।
हड़ताल से अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन पर जाने से अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। आमतौर पर इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, आपातकालीन सेवाओं और वार्ड प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।डॉक्टर यामिनी वर्मा ने बताया कि बस्तर में करीब 125 इंटर्न डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंटर्न डॉक्टर मरीजों की नियमित निगरानी करते हैं, जबकि कंसल्टेंट डॉक्टर सीमित समय के लिए उपलब्ध रहते हैं। ऐसे में हड़ताल का सीधा असर अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।
पहले काली पट्टी बांधकर जताया था विरोध
इंटर्न डॉक्टरों ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर उन्होंने पहले भी विरोध प्रदर्शन किया था। सभी डॉक्टरों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी। इसके अलावा कई बार ज्ञापन देकर भी अपनी समस्याओं से अवगत कराया गया।कांकेर के प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखते रहे, लेकिन जब कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला तो उन्हें अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

महंगाई और खर्चों का दिया हवाला
डॉक्टरों ने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में मौजूदा स्टाइपेंड से रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है। इंटर्नशिप के दौरान उन्हें दूर-दराज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी सेवाएं देनी पड़ती हैं, जिसके लिए आने-जाने का खर्च उठाना पड़ता है।इसके अलावा पीजी की तैयारी, किताबें और अन्य शैक्षणिक जरूरतों पर भी खर्च होता है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी जिम्मेदारियां अन्य राज्यों के इंटर्न डॉक्टरों के समान हैं, इसलिए स्टाइपेंड भी समान स्तर का होना चाहिए।इंटर्न डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द उनकी मांगों पर फैसला नहीं लेती है तो वे राजधानी रायपुर में बड़ा आंदोलन करेंगे। डॉक्टरों का कहना है कि वे स्वास्थ्य व्यवस्था को बाधित करना नहीं चाहते, लेकिन अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
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