Chhattisgarh Politics: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों बयानों के तीखे बाण चल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव की तुलना ‘बंदर’ (बेंदरा) से कर दी है, जिसके बाद प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बिलासपुर दौरे के दौरान दी गई इस विवादित टिप्पणी ने अब एक सामाजिक विवाद का रूप ले लिया है। बघेल के इस बयान के विरोध में छत्तीसगढ़ का प्रभावशाली साहू समाज लामबंद हो गया है। समाज का कहना है कि एक जिम्मेदार पद पर रहे व्यक्ति द्वारा इस तरह की अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना न केवल उपमुख्यमंत्री का अपमान है, बल्कि पूरे साहू समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाना है।
Chhattisgarh Politics: साहू समाज का अल्टीमेटम: ’10 दिन में मांगें माफी, वरना होगा आंदोलन’
भूपेश बघेल की टिप्पणी से आक्रोशित साहू समाज ने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि भूपेश बघेल 10 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ ने इस संबंध में राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी जिलाध्यक्षों को विधिवत पत्र जारी कर दिए गए हैं। समाज के अध्यक्ष नीरेन्द्र साहू ने घोषणा की है कि वे 5 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें आगामी रणनीति का खुलासा किया जाएगा।
Chhattisgarh Politics: छत्तीसगढ़ी मुहावरे के बहाने अरुण साव पर कसा था तंज
विवाद की जड़ भूपेश बघेल का वह बयान है जो उन्होंने बिलासपुर दौरे के समय दिया था। बघेल ने छत्तीसगढ़ी बोली में तंज कसते हुए कहा था कि, “जंगल के सभी राजा मन मिलकर बेंदरा ल राजा बना दिन” (जंगल के सभी राजाओं ने मिलकर बंदर को राजा बना दिया)। इस बयान को सीधे तौर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव से जोड़कर देखा जा रहा है। साहू समाज का तर्क है कि अरुण साव समाज के गौरव हैं और उनके विरुद्ध ऐसी निम्न स्तर की तुलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समाज का मानना है कि बघेल ने जानबूझकर उनके नेता की छवि धूमिल करने की कोशिश की है।
लिंगियाडीह आंदोलन के समर्थन में बघेल ने सरकार को घेरा
दरअसल, यह पूरा विवाद बिलासपुर के लिंगियाडीह में पिछले 37 दिनों से चल रहे एक स्थानीय आंदोलन के दौरान शुरू हुआ। पूर्व सीएम भूपेश बघेल वहाँ आंदोलनकारियों का समर्थन करने पहुँचे थे। उन्होंने राज्य सरकार की विकास योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि लिंगियाडीह बस्ती को उजाड़कर जो गार्डन बनाया जा रहा है, क्या मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ वहां टहलने आएंगे? उन्होंने उपमुख्यमंत्री अरुण साव के विभागों के कामकाज पर भी उंगली उठाई और कहा कि पिछले दो सालों में केवल 950 मीटर सड़क ही बन पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास कोई विजन नहीं है।
विधायक अमर अग्रवाल और अन्य भाजपा नेताओं पर भी साधा निशाना
भूपेश बघेल ने केवल उपमुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि बिलासपुर के विधायक अमर अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं पर भी जमकर प्रहार किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विधायक अमर अग्रवाल अब घर से निकलना बंद कर चुके हैं। बघेल के अनुसार, अमर अग्रवाल को मंत्री न बनाकर केवल ‘संतरी’ बना दिया गया है और अब उन्हें पार्टी में कुर्सी तक नसीब नहीं होती। इसके साथ ही उन्होंने अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक की स्थिति पर भी टिप्पणी की। बघेल ने जनता को भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ खड़े हैं और कोई भी उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा पाएगा।
साहू समाज की एकजुटता और पुलिस को ज्ञापन की तैयारी
भूपेश बघेल के इन हमलों के बाद अब भाजपा से ज्यादा साहू समाज मुखर नजर आ रहा है। साहू समाज के अध्यक्ष नीरेन्द्र साहू ने कड़े शब्दों में कहा कि समाज अपने गौरवशाली नेताओं का अपमान चुपचाप नहीं देखेगा। समाज ने सभी जिलाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हों और ज्ञापन के माध्यम से बघेल की इस टिप्पणी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करें। 5 जनवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, जिससे आगामी दिनों में छत्तीसगढ़ की सियासत में नई हलचल देखने को मिल सकती है।
















