Nashik-Pune Highway Protest: महाराष्ट्र के नासिक जिले में रविवार को नासिक-पुणे सेमी हाई-स्पीड रेलवे परियोजना के प्रस्तावित मार्ग में बदलाव के खिलाफ हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग थी कि रेलवे लाइन के लिए पहले निर्धारित मूल मार्ग में किसी भी परिस्थिति में बदलाव न किया जाए। विरोध के दौरान पुणे-नासिक हाईवे पर चक्काजाम किया गया, जिसके कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और वाहन चालकों को लंबे समय तक जाम में फंसे रहना पड़ा।

हाईवे पर चक्काजाम से यातायात प्रभावित
प्रदर्शनकारियों के सड़क पर उतरने के बाद पुणे-नासिक हाईवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई स्थानों पर यातायात धीमा हो गया और लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था को सामान्य करने का प्रयास किया। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर रास्ता खाली कराने की कोशिश भी की गई।

सत्यजीत तांबे समेत कई प्रदर्शनकारी हिरासत में
सिन्नर में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय विधान परिषद सदस्य सत्यजीत तांबे को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनके साथ कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने रोककर हिरासत में लिया। जब पुलिस तांबे को वाहन में लेकर जा रही थी, तब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहन को रोकने की कोशिश की। इसके बाद मौके पर पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तीखी बहस हुई और कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया।
बालासाहेब थोरात और राजाभाऊ वाजे भी आंदोलन में शामिल
नासिक-पुणे रेल परियोजना के मूल मार्ग को बनाए रखने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात तथा नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे भी शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने कहा कि पहले से प्रस्तावित छोटा और सीधा मार्ग ही परियोजना के लिए सबसे उपयुक्त है। उन्होंने सरकार से मार्ग में बदलाव का फैसला वापस लेने की मांग की।
GMRT को लेकर मार्ग बदलने का प्रस्ताव
रेल मार्ग को लेकर विवाद उस समय बढ़ा जब पुराने सीधे मार्ग को बदलने का प्रस्ताव सामने आया। प्रस्तावित मूल मार्ग नारायणगांव और संगमनेर से होकर गुजरता है। बताया जा रहा है कि पुणे जिले में स्थित जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप यानी GMRT के तकनीकी सिग्नलों पर संभावित प्रभाव को देखते हुए इस मार्ग को लेकर आपत्ति जताई गई है। इसके विकल्प के तौर पर अहिल्यानगर और शिरडी होकर नया मार्ग प्रस्तावित किया गया है।

अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित
मार्ग विवाद के तकनीकी पहलुओं की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने पूर्व परमाणु ऊर्जा आयोग अध्यक्ष अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित की है। समिति यह अध्ययन करेगी कि प्रस्तावित रेलवे लाइन से GMRT की गतिविधियों और तकनीकी सिग्नलों पर कोई असर पड़ सकता है या नहीं। आंदोलनकारियों ने समिति के गठन का स्वागत किया है, लेकिन जल्द निर्णय लेने की मांग भी की है।
60 दिन में रिपोर्ट देने की तांबे की मांग
अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर आयोजित चक्काजाम के दौरान सत्यजीत तांबे ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों का जनआंदोलन है। उन्होंने मांग की कि काकोडकर समिति 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे और इसके बाद अंतिम फैसला लिया जाए। तांबे ने यह भी कहा कि समिति को केवल GMRT से जुड़े तकनीकी पहलुओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक तालुका में स्थानीय नागरिकों से बातचीत कर उनकी राय भी दर्ज करनी चाहिए।
परियोजना पर खर्च और भूमि अधिग्रहण को लेकर सवाल
तांबे ने दावा किया कि परियोजना के लिए बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे स्टेशनों से जुड़े निर्माण कार्यों की टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में अचानक तकनीकी कारणों का हवाला देकर मार्ग बदलने के प्रस्ताव पर उन्होंने सवाल उठाए।
लोगों की परेशानी पर तांबे ने मांगी माफी
चक्काजाम के कारण आम लोगों को हुई परेशानी के लिए सत्यजीत तांबे ने माफी मांगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के हित में किया जा रहा है। इसी बीच आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने फोन पर तांबे से बातचीत की और लिखित आश्वासन दिए जाने की बात कही। हालांकि, स्थानीय नेताओं के मुताबिक पुलिस ने तांबे और अन्य प्रदर्शनकारियों को समृद्धि हाईवे की ओर आगे बढ़ने से रोक दिया।
Read More : Korea Masters 2026 : अश्मिता चालिहा ने रचा इतिहास, Korea Masters 2026 में जीता पहला BWF World Tour खिताब












