Carbosulfan Ban: धान, कपास और बागवानी फसलों में कीट नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक कार्बोसल्फान को लेकर केंद्र सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। सरकार इस रसायन के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में अगस्त के अंत तक अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। कृषि मंत्रालय और केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIBRC) की ओर से कार्बोसल्फान को Highly Toxic श्रेणी में रखा गया है। इसके बाद इसके इस्तेमाल और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की संभावना बढ़ गई है।
केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड ने प्रतिबंध की सिफारिश की
कार्बोसल्फान के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर संभावित खतरों को देखते हुए केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड ने इसकी विस्तृत समीक्षा की है। समीक्षा के बाद बोर्ड ने सरकार को इस कीटनाशक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। अब अंतिम फैसला केंद्र सरकार को लेना है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे रसायनों के इस्तेमाल पर पुनर्विचार जरूरी है, जिनसे लंबे समय तक नुकसान की आशंका बनी रहती है।
किसानों के बीच लोकप्रिय रहा है कार्बोसल्फान
ग्रामीण कृषि बाजारों में कार्बोसल्फान लंबे समय से किसानों के बीच इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह अलग-अलग कंपनियों के ब्रांड नामों के तहत बाजार में उपलब्ध रहा है। धान की फसल में तना छेदक जैसे कीटों और कपास में रस चूसने वाले कीटों से बचाव के लिए किसान इसका इस्तेमाल करते हैं। कई किसान इसे प्रभावी कीटनाशक मानते हैं। ऐसे में यदि केंद्र सरकार पूर्ण प्रतिबंध लागू करती है, तो कंपनियों को बाजार में मौजूद स्टॉक वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ सकती है।
प्रतिबंध के बाद किसानों के सामने विकल्प की चुनौती
अगर कार्बोसल्फान के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगती है, तो किसानों को फसलों को कीटों से बचाने के लिए दूसरे विकल्प अपनाने होंगे। लंबे समय से इस रसायन पर निर्भर किसानों के लिए अचानक बदलाव आसान नहीं होगा। उन्हें कम जहरीले रासायनिक कीटनाशकों के साथ-साथ जैविक विकल्पों की ओर भी बढ़ना पड़ सकता है। कृषि विभाग और विशेषज्ञों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी, ताकि किसानों को सुरक्षित और प्रभावी विकल्पों की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा सके।
इंसानी स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे की चिंता
वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कार्बोसल्फान एक सिस्टेमिक कीटनाशक है, जो पौधों के अंदर तक पहुंच सकता है। खेतों में इसके इस्तेमाल के दौरान किसान और कृषि श्रमिक सीधे इसके संपर्क में आ सकते हैं। लंबे समय तक जहरीले रसायनों के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम पैदा होने की आशंका जताई जाती रही है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसके सुरक्षित इस्तेमाल, मात्रा और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता जाहिर करते हैं।
पर्यावरण और मित्र कीटों पर भी असर
कार्बोसल्फान को लेकर चिंता केवल मानव स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इसके इस्तेमाल का असर पर्यावरण और खेतों में मौजूद लाभकारी जीवों पर भी पड़ सकता है। मिट्टी में मौजूद केंचुए और फसलों के परागण में मदद करने वाली मधुमक्खियां जैसे मित्र कीट कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। जहरीले कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से इन जीवों की संख्या प्रभावित होने की आशंका रहती है, जिसका असर लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।
कई देशों में पहले से लागू हैं प्रतिबंध
कार्बोसल्फान को लेकर भारत में प्रस्तावित कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया के कई विकसित देशों में इसके इस्तेमाल पर पहले से प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी यदि इसके इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाता है, तो इससे कृषि क्षेत्र में सुरक्षित कीटनाशकों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, प्रतिबंध लागू करने से पहले किसानों की जरूरतों और उपलब्ध विकल्पों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
कृषि निर्यात पर भी पड़ सकता है असर
कार्बोसल्फान को लेकर एक महत्वपूर्ण चिंता कृषि उत्पादों के निर्यात से भी जुड़ी है। भारत से विदेशों में भेजे जाने वाले बासमती चावल और कपास जैसे उत्पादों में यदि निर्धारित सीमा से अधिक रासायनिक अवशेष पाए जाते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है। इससे भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सुरक्षित कृषि रसायनों का इस्तेमाल बढ़ने से भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में विश्वसनीयता मजबूत हो सकती है।
किसानों पर तत्काल असर पड़ने की संभावना
सरकार यदि कार्बोसल्फान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है, तो शुरुआती दौर में किसानों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खासकर वे किसान जो धान, कपास और बागवानी फसलों में लंबे समय से इस कीटनाशक का इस्तेमाल करते रहे हैं, उन्हें नए विकल्प अपनाने होंगे। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण, उचित सलाह और प्रभावी वैकल्पिक कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
सुरक्षित विकल्पों से खेती को मिल सकता है बढ़ावा
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में कार्बोसल्फान के मुकाबले कम जहरीले रासायनिक उत्पादों के अलावा जैविक और एकीकृत कीट प्रबंधन के विकल्प भी मौजूद हैं। यदि किसानों को इन विकल्पों की सही जानकारी और उचित कीमत पर उपलब्धता मिलती है, तो फसल सुरक्षा प्रभावित किए बिना जहरीले रसायनों पर निर्भरता कम की जा सकती है। सरकार का फैसला किसानों की आय, फसल सुरक्षा, पर्यावरण और कृषि निर्यात—चारों क्षेत्रों पर असर डाल सकता है।
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