Magnus Carlsen: दुनिया के नंबर-1 शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित करते हुए ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप की शतरंज प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर लिया। शनिवार को खेले गए फाइनल में नॉर्वे के 35 वर्षीय ग्रैंडमास्टर ने बेलारूस के डेनिस लाजाविक को एकतरफा मुकाबले में हराया। खास बात यह रही कि कार्लसन ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं गंवाया और अजेय रहते हुए खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया।


ग्रैंड फाइनल में लाजाविक को दी करारी शिकस्त
टीम लिक्विड का प्रतिनिधित्व कर रहे कार्लसन ने ग्रैंड फाइनल में AG.AL के डेनिस लाजाविक को 2-0 से मात दी। दोनों सेट में कार्लसन ने 3-1 के समान अंतर से जीत दर्ज की। शुरुआत से ही उन्होंने आक्रामक और संतुलित रणनीति अपनाई, जिसका लाजाविक के पास प्रभावी जवाब नहीं दिखा। इस जीत के साथ कार्लसन ने टूर्नामेंट में अपनी निरंतरता और दबदबे का शानदार प्रदर्शन किया।

टीम लिक्विड को मिले 250 हजार डॉलर
खिताब जीतने के साथ कार्लसन ने अपनी टीम लिक्विड के लिए 250,000 अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि हासिल की। इसके अलावा टीम को 1000 क्लब चैंपियनशिप अंक भी मिले। वहीं, उपविजेता रहे डेनिस लाजाविक ने AG.AL के लिए 190,000 अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि और 750 क्लब चैंपियनशिप अंक अर्जित किए। इस प्रदर्शन के साथ कार्लसन ने अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
जोखिम लेकर खेलने की रणनीति रही सफल
खिताबी जीत के बाद पांच बार के विश्व चैंपियन कार्लसन ने अपनी रणनीति के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने लाजाविक के पिछले मुकाबलों का अध्ययन किया था और अपने कोचों के साथ भी चर्चा की थी। कार्लसन के मुताबिक, उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी की खेल शैली को ध्यान में रखते हुए जोखिम लेने का फैसला किया। उनका मानना था कि इस रणनीति से उन्हें मुकाबले में बेहतर स्थिति हासिल करने का मौका मिलेगा।
हिकारू की रणनीति से अलग खेला मुकाबला
कार्लसन ने कहा कि उन्होंने हिकारू नाकामुरा के मुकाबले लाजाविक के खिलाफ अलग तरीके से खेलने का प्रयास किया। उन्होंने लाजाविक के एंडगेम खेल का भी अध्ययन किया और उसी के आधार पर अपनी रणनीति तैयार की। कार्लसन के मुताबिक, उन्होंने प्रतिद्वंद्वी को स्पष्ट पोजीशनल बढ़त देने से बचते हुए ऐसे मौके बनाए, जहां जोखिम लेने का फायदा मिल सके। उनकी यह रणनीति फाइनल में पूरी तरह सफल रही।

अलीरेजा और निहाल के खिलाफ भी आए मुश्किल पल
कार्लसन ने माना कि टूर्नामेंट के दौरान ऐसे कई मौके आए जब उन्हें हार का खतरा महसूस हुआ। उन्होंने विशेष रूप से अलीरेजा फिरोजा और निहाल के खिलाफ मुकाबलों का जिक्र किया। हालांकि, इन मुश्किल परिस्थितियों से निकलकर उन्होंने जीत का सिलसिला जारी रखा। कार्लसन ने कहा कि उनका लक्ष्य कोई असाधारण प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि मौके के अनुसार जोखिम लेना था और वह बिना कोई मैच गंवाए टूर्नामेंट खत्म करने से बेहद खुश हैं।
नाकामुरा ने हासिल किया तीसरा स्थान
टूर्नामेंट में अमेरिका के दिग्गज खिलाड़ी हिकारू नाकामुरा ने तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने अलीरेजा फिरोजा को 4-1 से हराया। हालांकि, तीसरे स्थान के लिए हुआ मुकाबला तकनीकी समस्याओं और डिस्कनेक्शन के कारण विवादों में घिर गया। मैच के दौरान तकनीकी दिक्कतों ने दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबले को काफी प्रभावित किया।
तकनीकी विवाद के बाद अलीरेजा ने छोड़ा मैच
चौथे गेम में तकनीकी समस्या के बाद नाकामुरा को जीत मिली। इसके बाद अलीरेजा ने मुकाबला बीच में छोड़ दिया और बिल्डिंग से बाहर चले गए। उस समय नाकामुरा 3-1 से आगे थे और दो गेम अभी बाकी थे। अलीरेजा के मैच से हटने के बाद मुकाबले का परिणाम नाकामुरा के पक्ष में चला गया और उन्हें तीसरे स्थान का विजेता घोषित किया गया।
अधिकारियों के फैसले से नाकामुरा को मिली जीत
नाकामुरा ने बताया कि अलीरेजा के हटने के बाद उन्हें लगभग 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि प्रतिद्वंद्वी के मैच छोड़ने के कारण मुकाबला उनके पक्ष में फोरफिट माना जाएगा। इस तरह नाकामुरा ने तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि कार्लसन ने बिना कोई मैच हारे खिताब जीतकर एक बार फिर अपनी विश्व नंबर-1 स्थिति के अनुरूप शानदार प्रदर्शन किया।
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