Chhattisgarh Rakhi Campaign: देश की सीमाओं पर तैनात वीर जवानों के शौर्य, साहस और त्याग के प्रति सम्मान जताने के लिए छत्तीसगढ़ में चलाया गया ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा-सूत्र 0.4’ इस वर्ष ऐतिहासिक सफलता के साथ नया रिकॉर्ड बना चुका है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की भावुक अपील और प्रेरणा के बाद प्रदेशभर से 21 लाख राखियां एकत्र की गईं। इन राखियों के साथ शुभकामना संदेश और छत्तीसगढ़ के घर-आंगनों की पवित्र मिट्टी भी जवानों तक पहुंचाई जाएगी।


अंबिकापुर में हुआ गरिमामय आयोजन
संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा-सूत्र 0.4’ के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम के दौरान अंबिकापुर और सरगुजा संभाग से एकत्र की गईं राखियों का विशाल संग्रह पूर्व सैनिक महासभा के पदाधिकारियों को विधिवत सौंपा गया। इसके बाद रक्षा-सूत्र यात्रा को आगे रवाना किया गया।

जशपुर होते हुए दिल्ली पहुंचेगी यात्रा
रक्षा-सूत्रों से भरी यह विशेष यात्रा अंबिकापुर से आगे जशपुर पहुंचेगी। इसके बाद प्रदेश के निर्धारित पड़ावों से होते हुए राखियां नई दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय तक पहुंचाई जाएंगी। इस अभियान का उद्देश्य केवल राखियां भेजना नहीं, बल्कि देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे सैनिकों को छत्तीसगढ़ की जनता का भावनात्मक संदेश और अपनापन पहुंचाना भी है।
मंत्री की अपील पर शुरू हुआ जनअभियान
अभियान की शुरुआत में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर प्रदेश की माताओं, बहनों और बच्चों से सैनिकों के लिए हस्तनिर्मित राखियां तैयार करने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से राखियों के साथ जवानों के लिए शुभकामना पत्र और अपने आंगन की मिट्टी भेजने का भी आग्रह किया। उनकी अपील का प्रदेशभर में व्यापक असर देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने अभियान में भागीदारी निभाई।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने संभाली जिम्मेदारी
महिला एवं बाल विकास विभाग का मैदानी अमला इस अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी बना। जिला कार्यक्रम अधिकारियों, परियोजना अधिकारियों, सुपरवाइजरों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने गांव-गांव तथा वार्ड स्तर पर लोगों से राखियां एकत्र करने में समन्वय किया। विभागीय कर्मचारियों ने स्वयं भी राखियां तैयार कीं और अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

सामाजिक संगठनों ने बढ़ाया अभियान का दायरा
अभियान को सफल बनाने में विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, महिला स्व-सहायता समूहों और आम नागरिकों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। सामूहिक सहभागिता के कारण इस बार अभियान ने पिछले सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। वर्ष 2023 में 6.71 लाख, 2024 में 9 लाख और 2025 में 12.21 लाख राखियां एकत्र की गई थीं। वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 21 लाख हो गई।
21 लाख राखियां बनीं सैनिकों के लिए रक्षा-कवच
अंबिकापुर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सीमाओं पर कठिन परिस्थितियों में डटे सैनिकों की वजह से देशवासी अपने घरों में सुरक्षित और स्वतंत्र जीवन जी पाते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की बहनों की ओर से भेजी जा रही 21 लाख राखियां केवल रेशम के धागे नहीं हैं, बल्कि जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और विश्वास का प्रतीक हैं।
आंगन की मिट्टी में छिपा मातृभूमि का संदेश
मंत्री ने कहा कि राखियों के साथ भेजी जा रही घर-आंगन की पवित्र मिट्टी सैनिकों को यह एहसास कराएगी कि मातृभूमि का कण-कण उनके साथ है। उन्होंने इस अभियान को जनभावनाओं से जुड़ा प्रयास बताते हुए पूर्व सैनिक महासभा, महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले तथा सहयोगी सामाजिक संगठनों का आभार जताया। इस अभियान ने एक बार फिर साबित किया कि छत्तीसगढ़ की जनता अपने सरहद के जवानों के साथ मजबूती से खड़ी है।
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