AI Warning : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच रोजगार को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है। टेक्नोलॉजी क्षेत्र में पहले से ही ऑटोमेशन के कारण कई तरह के काम बदल रहे हैं। अब AI के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए ‘Godfather of AI’ कहे जाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन ने बड़े पैमाने पर बेरोजगारी की आशंका जताई है। उनकी चेतावनी ने AI के भविष्य और मानव रोजगार को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है।
बर्नी सैंडर्स के साथ बातचीत में रखी अपनी राय
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स के साथ बातचीत के दौरान जेफ्री हिंटन ने AI और नौकरियों के भविष्य पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि अब इस संभावना को नजरअंदाज करना मुश्किल है कि AI की वजह से बड़े स्तर पर बेरोजगारी पैदा हो सकती है। उनके मुताबिक टेक कंपनियां AI को विकसित करने के लिए डेटा सेंटर और अत्याधुनिक चिप्स में भारी निवेश कर रही हैं।
कंपनियों का बड़ा दांव इंसानों की जगह AI पर
हिंटन के अनुसार AI कंपनियों का निवेश केवल नई तकनीक तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारोबारी लक्ष्य यह भी है कि AI इंसानों द्वारा किए जाने वाले काम को कम लागत में पूरा कर सके। यदि मशीनें कम खर्च में अधिक काम करने लगती हैं, तो कंपनियां मानव कर्मचारियों पर अपनी निर्भरता कम कर सकती हैं। यही स्थिति भविष्य में रोजगार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
टेक जगत के कई दिग्गज भी जता चुके हैं चिंता
रोजगार पर AI के प्रभाव को लेकर जेफ्री हिंटन अकेले नहीं हैं। टेक इंडस्ट्री के कई बड़े नाम भविष्य में कामकाज के स्वरूप में बड़े बदलाव की संभावना जता चुके हैं। हालांकि, सभी विशेषज्ञ इस बदलाव को केवल नकारात्मक नजरिए से नहीं देखते। कुछ का मानना है कि AI मौजूदा नौकरियों को बदलने के साथ नए काम और नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
जेनसन हुआंग ने चार दिन के वर्कवीक की संभावना बताई
Nvidia के CEO जेनसन हुआंग का मानना है कि AI धीरे-धीरे लगभग हर तरह के काम को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, उनका नजरिया पूरी तरह चिंताजनक नहीं है। हुआंग के अनुसार AI की मदद से कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ सकती है और काम करने का तरीका बदल सकता है। भविष्य में तकनीकी प्रगति के कारण चार दिन का वर्कवीक जैसी व्यवस्था भी संभव हो सकती है।
बिल गेट्स ने इंसानों की जरूरत घटने की बात कही
Microsoft के सह-संस्थापक बिल गेट्स भी AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में कई ऐसे काम, जिनके लिए अभी इंसानों की जरूरत होती है, उन्हें AI और ऑटोमेशन संभाल सकते हैं। इससे इंसानों के लिए काम के घंटे और रोजगार की प्रकृति दोनों बदल सकती हैं। हालांकि, नई तकनीक नए क्षेत्रों में अवसर भी पैदा कर सकती है।
एलन मस्क ने सिंगुलैरिटी की अलग तस्वीर दिखाई
एलन मस्क ने AI और रोबोटिक्स के भविष्य को लेकर इससे भी अधिक बड़ा अनुमान लगाया है। उनके मुताबिक दो दशकों से कम समय में ऐसी स्थिति आ सकती है, जब अधिकांश लोगों के लिए काम करना जरूरी नहीं रह जाएगा। मस्क ने संभावित भविष्य को ‘सिंगुलैरिटी’ जैसी स्थिति से जोड़ा है, जिसमें AI और रोबोटिक्स बेहद तेजी से विकसित होकर मानव क्षमताओं से आगे निकल सकते हैं।
अमेरिका में करोड़ों नौकरियों पर ऑटोमेशन का खतरा
बर्नी सैंडर्स भी लंबे समय से ऑटोमेशन और AI के कारण रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। उनके 2025 के अनुमान के मुताबिक अमेरिका में ऑटोमेशन की वजह से करीब 10 करोड़ नौकरियां प्रभावित या समाप्त होने के खतरे में हो सकती हैं। इसका असर केवल कम वेतन वाली नौकरियों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अकाउंटिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और नर्सिंग जैसे पेशे भी प्रभावित हो सकते हैं।
AI का भविष्य बताना अभी भी बेहद मुश्किल
जेफ्री हिंटन खुद AI के भविष्य को लेकर कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं करते। उनका कहना है कि अगले एक-दो वर्षों के बदलाव का अनुमान कुछ हद तक लगाया जा सकता है, लेकिन दस साल बाद AI किस स्तर पर पहुंच चुका होगा, यह बताना बेहद कठिन है। यही अनिश्चितता AI को लेकर सबसे बड़ी चुनौती भी है।
AI से खतरा और अवसर दोनों मौजूद
AI के भविष्य की तस्वीर दो पहलुओं वाली दिखाई देती है। एक ओर यह तकनीक काम को तेज, आसान और कम खर्चीला बना सकती है। इससे नए उद्योग और रोजगार के नए क्षेत्र विकसित हो सकते हैं। दूसरी ओर, अगर AI इंसानों की तुलना में कम लागत पर वही काम करने लगे, तो बड़ी संख्या में पारंपरिक नौकरियों की जरूरत घट सकती है। ऐसे में आने वाले समय में AI के साथ रोजगार संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
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