Liver Health : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खान-पान और खराब लाइफस्टाइल का सीधा असर पाचन तंत्र और लिवर की सेहत पर पड़ सकता है। लगातार बाहर का खाना, पर्याप्त नींद न लेना और पोषक तत्वों की कमी जैसी आदतों से गैस, अपच, पेट फूलना, थकान और लिवर से जुड़ी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में डाइट में कुछ स्वस्थ विकल्प शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
डॉ. सौरभ सेठी ने बताए तीन हेल्दी ड्रिंक्स
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी के अनुसार, रोजमर्रा की डाइट में कुछ ऐसे पेय शामिल किए जा सकते हैं, जो शरीर को जरूरी पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करने में मदद करते हैं। उन्होंने तीन विकल्पों पर जोर दिया है—ग्रीन टी, बिना चीनी वाली कॉफी और ताजे फल-सब्जियों से तैयार पौष्टिक स्मूदी। हालांकि, किसी भी पेय को बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
ग्रीन टी में पाए जाते हैं एंटीऑक्सीडेंट
ग्रीन टी को अक्सर वजन घटाने वाली ड्रिंक के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इसके कई अन्य पोषण संबंधी फायदे भी बताए जाते हैं। इसमें कैटेचिन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से निपटने में मदद कर सकते हैं। संतुलित मात्रा में ग्रीन टी को डाइट का हिस्सा बनाना कुछ लोगों के लिए एक स्वस्थ विकल्प हो सकता है।
लिवर के लिए भी उपयोगी मानी जाती है ग्रीन टी
ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि इसे लिवर की सेहत से भी जोड़ा जाता है। इसके अलावा, कुछ लोगों के लिए यह पाचन संबंधी दिनचर्या का हिस्सा बन सकती है। हालांकि, केवल ग्रीन टी पीने से लिवर की बीमारी ठीक होने का दावा नहीं किया जा सकता।
बिना चीनी वाली कॉफी का विकल्प
कॉफी को लेकर अक्सर लोगों के मन में भ्रम रहता है कि यह स्वास्थ्य के लिए अच्छी है या नुकसानदायक। डॉ. सेठी के अनुसार, उचित मात्रा में बिना चीनी वाली कॉफी लिवर के लिए फायदेमंद हो सकती है। कॉफी में कई बायोएक्टिव कंपाउंड और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जिनका संबंध लिवर हेल्थ से जोड़ा गया है।
फैटी लिवर से भी जुड़ा है कॉफी का सेवन
कुछ अध्ययनों में नियमित कॉफी सेवन और लिवर की बेहतर सेहत के बीच संबंध पाया गया है। इसे फैटी लिवर जैसी स्थितियों के प्रबंधन में सहायक माना गया है। इसके अलावा, शोधों में कॉफी के सेवन और लिवर कैंसर के कम जोखिम के बीच भी संबंध सामने आया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कॉफी किसी बीमारी से बचाव की गारंटी देती है।
चीनी मिलाने से बचने की सलाह
अगर कॉफी को स्वास्थ्यवर्धक विकल्प के तौर पर डाइट में शामिल किया जा रहा है, तो उसमें अधिक चीनी या मीठे सिरप डालने से बचना बेहतर है। ज्यादा चीनी का सेवन वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। हालांकि, कैफीन के प्रति संवेदनशील लोगों को कॉफी की मात्रा सीमित रखनी चाहिए।
फलों और सब्जियों की स्मूदी भी अच्छा विकल्प
तीसरे विकल्प के तौर पर ताजे फलों और सब्जियों से तैयार स्मूदी को डाइट में शामिल किया जा सकता है। सही सामग्री से बनाई गई स्मूदी शरीर को फाइबर, विटामिन, मिनरल और अन्य पोषक तत्व प्रदान कर सकती है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती है, जो अपनी डाइट में अलग-अलग फल और सब्जियां शामिल करने का आसान तरीका तलाश रहे हैं।
बेरीज, पालक और नारियल पानी का मिश्रण
बेरीज को एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फलों में शामिल किया जाता है। स्मूदी में पालक मिलाने से फाइबर और अन्य पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं, जबकि नारियल पानी शरीर में तरल पदार्थ की पूर्ति में मदद करता है। हालांकि, स्मूदी बनाते समय अतिरिक्त चीनी या मीठे पदार्थों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
हेल्दी ड्रिंक्स के साथ संतुलित डाइट जरूरी
ग्रीन टी, बिना चीनी वाली कॉफी और पोषक तत्वों से भरपूर स्मूदी को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। लेकिन केवल इन तीन पेय पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। पेट और लिवर की बेहतर सेहत के लिए संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि और अच्छी नींद भी महत्वपूर्ण हैं। लगातार पेट दर्द, अपच, अत्यधिक थकान या लिवर से संबंधित कोई लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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