Surguja Agri Loan Scam: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से सहकारी बैंकिंग प्रणाली में एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सीतापुर ब्लॉक के केरजू सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले हजारों किसान रातों-रात कर्जदार बन गए हैं। किसानों का आरोप है कि उन्होंने जितना कर्ज लिया ही नहीं, उससे कहीं अधिक राशि उनके बैंक खातों में ऋण के रूप में दर्ज कर दी गई है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर आक्रोशित किसानों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया।
धान की मेहनत पर फिर गया पानी: समायोजन ने तोड़ी कमर
किसानों को इस महाघोटाले की जानकारी तब मिली जब वे अपनी साल भर की मेहनत की फसल ‘धान’ को सरकारी केंद्रों पर बेचकर भुगतान लेने बैंक पहुंचे। सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर धान बेचने के बाद जब किसान सहकारी बैंक पेटला पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि उनके खातों में लाखों रुपये का कर्ज बकाया है। नियमानुसार, धान बिक्री से प्राप्त राशि को उस कथित कर्ज के एवज में ‘एडजस्ट’ (समायोजन) कर लिया गया। परिणामस्वरुप, किसानों के हाथ खाली रह गए और उनके घर चलाने के लाले पड़ गए हैं।
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट का घेराव
सोमवार को इस समस्या से त्रस्त होकर लगभग 200 से अधिक किसान कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत भी किसानों के समर्थन में मैदान में उतरे। उन्होंने कलेक्टर अजीत वसंत से मुलाकात कर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। पूर्व मंत्री ने दावा किया कि यह घोटाला मामूली नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का है। उनके अनुसार, करीब 2,000 से अधिक निर्दोष किसानों के नाम का उपयोग कर फर्जी तरीके से ऋण निकाला गया है, जिसकी जानकारी खुद किसानों को भी नहीं थी।
समिति प्रबंधक की संदिग्ध आत्महत्या ने बढ़ाया रहस्य
इस पूरे प्रकरण में एक काला अध्याय केरजू सहकारी समिति के प्रबंधक दिनेश गुप्ता की मौत से जुड़ा है। प्रबंधक दिनेश गुप्ता ने बीती 25 दिसंबर की रात अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। बताया जा रहा है कि सुसाइड करने से पहले उसी रात उनका किसानों के साथ लोन समायोजन को लेकर तीखा विवाद भी हुआ था। चर्चा है कि गुप्ता को करोड़ों रुपये के इस फर्जी लोन घोटाले की अंदरूनी जानकारी थी और संभवतः इसी दबाव के चलते उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया।
पांच गांवों के हजारों किसान फर्जीवाड़े के जाल में
सीतापुर ब्लॉक की केरजू सहकारी समिति के दायरे में मुख्य रूप से पांच गांव—केरजू, कुनमेरा, ढोढ़ागांव, बंशीपुर और हरदीडांड आते हैं। इन गांवों के लगभग सभी पंजीकृत किसानों के खातों में हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि जब उन्होंने पारदर्शिता के लिए सहकारी बैंक से ऋण लेने वाले व्यक्तियों की सूची मांगी, तो बैंक प्रबंधन ने लिस्ट देने से साफ इनकार कर दिया। सूचना साझा न करने की बैंक की इस जिद ने घोटाले के शक को और पुख्ता कर दिया है।
प्रशासनिक आश्वासन: जांच के लिए टीम का होगा गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने किसानों को आश्वस्त किया है कि इस पूरे प्रकरण की सूक्ष्मता से जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाएगा जो समिति के दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन की पड़ताल करेगा। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़ा सिद्ध होता है, तो संबंधित अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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