Hockey World Cup 2026: अर्जेंटीना के खिलाफ अहम मुकाबले में हार के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम का वर्ल्ड कप अभियान समाप्त हो गया। सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारत को यह मुकाबला हर हाल में जीतना जरूरी था, लेकिन टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। इससे पहले भारतीय महिला हॉकी टीम भी टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थी। दोनों टीमों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय हॉकी की तैयारियों और रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पीआर श्रीजेश ने जताई नाराजगी
भारत के पूर्व दिग्गज गोलकीपर और हॉकी टीम के पूर्व खिलाड़ी पीआर श्रीजेश ने पुरुष और महिला दोनों टीमों के वर्ल्ड कप से बाहर होने पर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर टीम के प्रदर्शन और तैयारी से जुड़े कई अहम सवाल उठाए। श्रीजेश की प्रतिक्रिया खासतौर पर महिला टीम के मुख्य कोच स्योर्ड मारिन की भूमिका को लेकर चर्चा में है।
एशियन गेम्स पर ध्यान देने की सलाह
श्रीजेश ने अपनी पोस्ट में व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि एशियन गेम्स आने वाले हैं। उन्होंने लिखा कि वहां स्वर्ण पदक जीतने के बाद लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के सपने देखे जा सकते हैं। उनके इस बयान में मौजूदा वर्ल्ड कप प्रदर्शन को लेकर नाराजगी साफ दिखाई दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एशियन गेम्स को लक्ष्य बताकर विश्व कप में हुई कमियों को नजरअंदाज किया जा सकता है।
महिला टीम के कोच पर उठाए सवाल
पीआर श्रीजेश ने महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच स्योर्ड मारिन की तैयारी के दौरान मौजूदगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड कप से ठीक पहले मुख्य कोच लंबे ब्रेक पर थे। इसके बावजूद महिला खिलाड़ियों ने पूरी मेहनत के साथ मैदान पर प्रदर्शन किया और अपनी क्षमता के मुताबिक बेहतर खेलने की कोशिश की। श्रीजेश ने खिलाड़ियों के प्रयास की सराहना करते हुए कोचिंग व्यवस्था में जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया।
आखिरी तैयारी में कोच की गैरमौजूदगी पर सवाल
श्रीजेश का कहना है कि किसी भी बड़े टूर्नामेंट से पहले तैयारी का अंतिम चरण बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में मुख्य कोच की गैरमौजूदगी टीम की तैयारी और रणनीति को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने सवाल किया कि यदि टीम के अंतिम तैयारी चरण में मुख्य कोच उपलब्ध नहीं हों तो खिलाड़ियों से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उनके मुताबिक, केवल खिलाड़ियों से जवाब मांगना पर्याप्त नहीं है।
बड़ी टीमों के खिलाफ प्रदर्शन पर चर्चा
पूर्व भारतीय गोलकीपर ने पुरुष टीम के प्रदर्शन और शीर्ष हॉकी टीमों के खिलाफ मुकाबलों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब भारत किसी मजबूत टीम से हारता है तो इसे अक्सर सीखने का अनुभव बताया जाता है। वहीं किसी एशियाई टीम को हराने पर इसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जाता है। श्रीजेश ने पूछा कि भारत ऐसी टीम तैयार कर रहा है जो केवल अच्छा हॉकी खेले या ऐसी टीम जो दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों को भी हराने में सक्षम हो।
वर्ल्ड कप प्रयोग करने की जगह नहीं
श्रीजेश ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सीखने की प्रक्रिया के पीछे लगातार छिपना बंद करना होगा। उनके मुताबिक वर्ल्ड कप जैसा बड़ा मंच प्रयोग या अभ्यास के लिए नहीं होता। यह दुनिया की शीर्ष टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा का मंच है, जहां खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि खराब प्रदर्शन के बाद मुश्किल सवाल कौन पूछेगा और जवाबदेही तय करने की जिम्मेदारी कौन लेगा।
खिलाड़ियों के प्रयास को भी मिला समर्थन
हालांकि श्रीजेश ने टीम प्रबंधन और तैयारी को लेकर कड़े सवाल उठाए, लेकिन उन्होंने खिलाड़ियों के प्रयास को नजरअंदाज नहीं किया। खासतौर पर महिला टीम की खिलाड़ियों के संघर्ष और मेहनत की उन्होंने सराहना की। उनका मानना है कि खिलाड़ियों को पर्याप्त समर्थन, सही तैयारी और मजबूत रणनीति मिलना जरूरी है, ताकि वे बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
एशियन गेम्स अब अगली बड़ी चुनौती
वर्ल्ड कप अभियान खत्म होने के बाद भारतीय हॉकी टीम के सामने अब आगामी एशियन गेम्स एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन भारत के लिए लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक की दिशा में अहम हो सकता है। लेकिन श्रीजेश की टिप्पणियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल अगले टूर्नामेंट को लक्ष्य बनाना पर्याप्त नहीं होगा। भारतीय हॉकी व्यवस्था को प्रदर्शन, तैयारी और जवाबदेही के स्तर पर भी गंभीर आत्ममंथन करना होगा।
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