Onion Price Today : महाराष्ट्र के नासिक में प्याज की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली है। कई बाजारों में प्याज का भाव करीब 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। एक ही दिन में कीमतों में 5 से 8 रुपये प्रति किलो की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं कुछ बाजारों में थोक कीमतें 60 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंचने की खबर है। बढ़ते दामों के बीच सरकार ने दिल्ली में उपभोक्ताओं को राहत देने की तैयारी शुरू कर दी है।
विशेष ट्रेन से दिल्ली भेजा जाएगा प्याज
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और दिल्ली के ग्राहकों को अपेक्षाकृत सस्ती दर पर प्याज उपलब्ध कराने के लिए मंगलवार को विशेष ट्रेन चलाई जाएगी। इस ट्रेन के जरिए नासिक से करीब 850 मीट्रिक टन प्याज दिल्ली भेजने की योजना है। सरकार की कोशिश है कि अतिरिक्त आपूर्ति के जरिए राजधानी के बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाई जाए और कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।
पिछले साल से काफी महंगा हुआ प्याज
मौजूदा कीमतें पिछले साल की तुलना में काफी अधिक हैं। 2025 को छोड़ दें तो पिछले पांच वर्षों के दौरान अगस्त महीने में प्याज की औसत थोक कीमत करीब 30 रुपये प्रति किलो रही है। वहीं पिछले वर्ष अगस्त में प्याज के दाम असामान्य रूप से कम थे और लगभग 15 से 20 रुपये प्रति किलो के बीच कारोबार कर रहे थे। ऐसे में इस साल की कीमतों में बढ़ोतरी उपभोक्ताओं को ज्यादा महसूस हो रही है।
किसानों ने मौजूदा कीमतों को बताया उचित
प्याज की बढ़ती कीमतों से किसानों को फिलहाल राहत की उम्मीद है। किसानों का कहना है कि लंबे समय तक कम भाव मिलने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा था। अब मौजूदा कीमतें उन्हें पुराने घाटे की कुछ भरपाई करने का अवसर दे रही हैं। किसान मनोहर नागरे ने खेती की बढ़ती लागत का जिक्र करते हुए बताया कि यूरिया की कीमत करीब 350 रुपये तक पहुंच गई है, जो मार्च के मुकाबले लगभग 50 रुपये अधिक है।
उत्पादन लागत बढ़कर 2500 रुपये क्विंटल
किसानों के मुताबिक प्याज की उत्पादन लागत भी लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में यह लागत करीब 2,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। इसके अलावा मई में हुई बेमौसम बारिश ने रबी प्याज की फसल को भी नुकसान पहुंचाया था। किसानों का कहना है कि मौसम की मार और बढ़ती लागत के कारण उन्हें पहले ही काफी नुकसान हो चुका है।
स्टोरेज में प्याज खराब होने से बढ़ी चिंता
किसानों के अनुसार भंडारण में रखा प्याज भी लगातार खराब हो रहा है। लंबे समय तक स्टोरेज के दौरान प्याज का वजन कम होने के साथ-साथ सड़ने की समस्या भी सामने आ रही है। किसानों का दावा है कि तीन महीने के दौरान भंडारण से करीब 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त नुकसान हो सकता है। ऐसे में उनका कहना है कि मौजूदा बाजार भाव पुराने नुकसान की भरपाई के लिए जरूरी हैं।
किसान नेता ने सरकार को दी चेतावनी
किसान नेता भरत दिघोले ने सरकार को प्याज की कीमतों को कृत्रिम तरीके से नियंत्रित करने के खिलाफ चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जब किसानों को कम कीमतों पर प्याज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा था, तब उन्हें अपेक्षित मदद नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अब यदि बाजार में अनुचित हस्तक्षेप किया गया तो महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों में नाराजगी बढ़ सकती है।
NAFED और NCCF की भूमिका पर सवाल
भरत दिघोले ने NAFED और NCCF के खरीद तथा भंडारण कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि खरीद और स्टोरेज व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को रोका गया होता तो सरकार के पास पर्याप्त प्याज स्टॉक मौजूद रहता। इससे ग्राहकों को कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती थी और अचानक बढ़ी कीमतों का दबाव भी कम किया जा सकता था।
किसानों से धीरे-धीरे स्टॉक बेचने की अपील
महाराष्ट्र मार्केटिंग विभाग के निदेशक और लासलगांव मार्केट कमिटी के पूर्व चेयरमैन जयदत्त होल्कर ने कहा कि किसानों को अपने भंडारित प्याज को धीरे-धीरे बाजार में लाने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि NAFED और NCCF के जरिए खरीदा गया प्याज विशेष ट्रेन से दिल्ली भेजने की योजना है। उनका कहना है कि बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार को अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए।
15 दिनों में करीब 50 फीसदी बढ़े भाव
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार लासलगांव मंडी में प्याज की आवक लगातार बनी हुई है। इसके बावजूद पिछले करीब 15 दिनों में कीमतों में लगभग 50 फीसदी की बढ़ोतरी ने सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को मिल रहा मौजूदा भाव ऐतिहासिक अगस्त औसत के आसपास ही है। हालांकि पिछले वर्ष कीमतें बेहद कम रहने के कारण इस बार का भाव सामान्य से काफी ज्यादा दिखाई दे रहा है।
जमाखोरी पर सरकार की नजर जरूरी
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अचानक बढ़ी मांग और कीमतों पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए। इसके साथ ही जमाखोरी की संभावनाओं पर भी नजर रखना जरूरी है। यदि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसा संतुलन बनाना जरूरी है, जिससे उत्पादकों को उचित दाम मिले और बढ़ती कीमतों का अनावश्यक बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े।
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