AISA CJP Support : ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च को समर्थन देने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि छात्र आंदोलनों से जुड़े लंबित मामलों को वापस लिया जाना चाहिए और पिछले प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर पैलेट तथा गोलियां चलाए जाने की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। AISA के मुताबिक, छात्रों से जुड़े ये मुद्दे अभी तक पूरी तरह हल नहीं हुए हैं और सरकार को इस पर जवाबदेही तय करनी चाहिए।
छात्र आंदोलन से जुड़े मामले अब भी लंबित
AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बुधवार को पीटीआई से बातचीत में कहा कि जिन मुद्दों को लेकर छात्र आंदोलन शुरू हुआ था, वे अभी भी अनसुलझे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने पहले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बावजूद कई मामले अब तक लंबित हैं। उनके अनुसार, सरकार को छात्रों पर दर्ज सभी मामलों को पूरी तरह वापस लेना चाहिए।
पैलेट और गोली चलाने के आरोपों की जांच की मांग
नेहा बोरा ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पैलेट और गोलियां चलाए जाने के आरोपों की जांच होनी चाहिए और इसके लिए सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। AISA अध्यक्ष के मुताबिक, छात्रों पर मामले दर्ज रहते हुए आंदोलन को पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता। उन्होंने इसे छात्र आंदोलन से जुड़ा प्रमुख मुद्दा बताया।
पांच सितंबर को फिर आंदोलन करेगा CJP
अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद करीब एक महीने तक अपना आंदोलन स्थगित रखा था। अब पार्टी ने शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है। 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के दिन दिल्ली में प्रस्तावित मार्च में उन परिवारों की भागीदारी भी होगी, जिन्होंने नीट परीक्षा विवाद के दौरान अपने बच्चों को खोया है। जुलाई के प्रदर्शन में कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित छात्रों के परिवारों के भी मार्च में शामिल होने की बात कही गई है।
NEET विवाद से जुड़े परिवार भी मार्च में होंगे शामिल
CJP के प्रस्तावित मार्च का एक प्रमुख मुद्दा नीट परीक्षा विवाद भी रहेगा। आंदोलन से जुड़े नेताओं के अनुसार, परीक्षा रद्द होने और बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने के घटनाक्रम से प्रभावित परिवार मार्च में शामिल होंगे। AISA अध्यक्ष ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत में ही सरकार को प्रभावित परिवारों की समस्याओं और चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लोगों के साथ संवाद का रास्ता सीमित कर दिया है।
सरकार से बातचीत और जवाबदेही की मांग
नेहा बोरा ने कहा कि छात्रों और युवाओं को सड़कों पर उतरने की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि उनकी समस्याओं को पर्याप्त रूप से नहीं सुना गया। उन्होंने कहा कि AISA ऐसे लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील आंदोलनों के साथ खड़ा रहेगा, जो सरकार से जनता के प्रति जवाबदेही की मांग करते हैं। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को विरोध करने वाले छात्रों और नागरिकों से बातचीत करनी चाहिए।
झारखंड के छात्र आंदोलन में भी शामिल हुई थीं बोरा
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा इससे पहले झारखंड में कथित भर्ती परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों में भी हिस्सा ले चुकी हैं। उन्होंने पिछले महीने दिल्ली में नीट प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थी हैं और उनका छात्र संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध है।
दिल्ली पुलिस को अभी मार्च का अनुरोध नहीं मिला
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि उसे 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च को लेकर अभी तक कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है। पुलिस के मुताबिक, यदि आयोजन के संबंध में आवेदन मिलता है तो उसकी समीक्षा की जाएगी। इस पर नेहा बोरा ने कहा कि AISA पुलिस की प्रतिक्रिया का इंतजार करेगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कई प्रदर्शन बिना पुलिस अनुमति के आयोजित हुए हैं।
विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर AISA का जोर
नेहा बोरा ने कहा कि AISA इस सिद्धांत का समर्थन करता है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के लिए हर बार अनुमति अनिवार्य नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी नीतियों और फैसलों को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए। फिलहाल 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। पुलिस की ओर से आवेदन मिलने के बाद कार्यक्रम को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
Read More : Aimen Anwer Retirement : पाकिस्तान की स्टार गेंदबाज का अचानक संन्यास, अब किस नई भूमिका में दिखेंगी ऐमन?