Nepal Flood Update : नेपाल और तिब्बत में बुधवार सुबह आए भीषण जलसैलाब ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। आपदा में अब तक 392 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सीमा के दोनों तरफ 1468 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में मौजूद कम से कम 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस बीच नेपाल में एक और बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने एक नई बनी बैरियर झील को लेकर चेतावनी जारी की है।
बैरियर झील में बढ़ता पानी बना नया खतरा
चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार सीमा क्षेत्र में बनी नई बैरियर झील में पानी लगातार बढ़ रहा है और इसके ओवरफ्लो होने की स्थिति बन गई है। मंत्रालय ने आशंका जताई है कि यदि पानी की मात्रा और बढ़ती है तो झील का प्राकृतिक अवरोध टूट सकता है। ऐसी स्थिति में अचानक बड़े पैमाने पर पानी नीचे की ओर आने से नेपाल के पहले से प्रभावित इलाकों में एक और गंभीर बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
ग्लेशियर टूटने के बाद आया मलबे और पानी का सैलाब
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने और उसके बाद हिमस्खलन की घटनाओं से अचानक बाढ़ की स्थिति बनी। तेज बहाव अपने साथ भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा लेकर नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धाडिंग क्षेत्रों तक पहुंचा। पानी और मलबे का वेग इतना ज्यादा था कि नदी घाटियों के किनारे बसे कई गांव और कस्बे बुरी तरह प्रभावित हो गए।
रसुवा और नुवाकोट में बस्तियां मलबे में दबीं
सबसे ज्यादा तबाही वाले इलाकों में रसुवा और नुवाकोट भी शामिल हैं। यहां कई बस्तियां पानी, कीचड़ और मलबे की चपेट में आ गईं। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के तेज बहाव ने सड़कों, पुलों और पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचाया। कई स्थानों पर संपर्क मार्ग पूरी तरह टूट जाने से राहत और बचाव कार्यों में बड़ी मुश्किलें सामने आ रही हैं।
सड़क-पुल बहने से राहत टीमों के सामने चुनौती
जलसैलाब के बाद कई गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। सड़कें और पुल बह जाने के कारण बचाव दल प्रभावित इलाकों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई घर, बाजार और सरकारी इमारतें कीचड़ और मलबे के नीचे दब गई हैं। सोशल मीडिया पर सामने आ रहे वीडियो और तस्वीरों में बाढ़ की भयावहता और भारी नुकसान का मंजर दिखाई दे रहा है।
नेपाल और तिब्बत में 392 लोगों की मौत
अधिकारियों के मुताबिक इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 392 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें नेपाल में 389 और पड़ोसी तिब्बत में तीन लोगों की मौत बताई गई है। नेपाल की ओर से 910 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है, जबकि चीनी प्रशासन ने तिब्बत में 558 लोगों से संपर्क नहीं होने की बात कही है। दोनों क्षेत्रों के आंकड़ों को मिलाने पर लापता लोगों की संख्या 1468 तक पहुंचती है।
हेलिकॉप्टर और जमीन से चल रहा बचाव अभियान
नेपाल पुलिस के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों से 796 लोगों को हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 50 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा 796 अन्य लोगों को जमीनी रास्तों के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। बचाव दल हेलिकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी टीमों की मदद से गांवों, नदी किनारों और संभावित प्रभावित क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं।
नेपाल में 290 भारतीयों से संपर्क नहीं
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में मौजूद 290 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। आपदा के बाद भारतीय अधिकारियों ने लापता नागरिकों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी जुटाने के साथ स्थानीय प्रशासन के साथ भी समन्वय किया जा रहा है।
जयशंकर ने राजदूतों से की वर्चुअल बैठक
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल और चीन में तैनात भारत के राजदूतों के साथ वर्चुअल बैठक कर स्थिति की समीक्षा की है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से बातचीत कर आपदा पर चिंता जताई थी। भारत की ओर से नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता और सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है।
नई बाढ़ की आशंका के बीच बढ़ी चिंता
नेपाल पहले ही भीषण जलसैलाब से जूझ रहा है और अब बैरियर झील में बढ़ते पानी की चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां संभावित नए खतरे को देखते हुए स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
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