Jhiram Ghati Case: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एक बार फिर अदालत के फैसले का इंतजार बढ़ गया है। NIA कोर्ट ने 20 अगस्त को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला 31 अगस्त को सुनाने के लिए सुरक्षित रखा था। सोमवार को अदालत में मामले की सुनवाई हुई, लेकिन कोर्ट ने फैसला सुनाने की तारीख आगे बढ़ा दी। अब इस बहुचर्चित मामले में 5 सितंबर को फैसला सुनाए जाने की संभावना है।
13 साल से चल रही है झीरम कांड की जांच
दरभा के झीरम घाटी में हुआ यह हत्याकांड छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश के सबसे चर्चित नक्सली हमलों में शामिल है। घटना के करीब 13 साल बाद भी मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है। NIA कोर्ट को इस प्रकरण में 10 आरोपियों के संबंध में फैसला सुनाना है। मामले में पहले कुल 11 आरोपी थे, लेकिन इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है। अब बाकी आरोपियों को लेकर अदालत का निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फैसले से पहले भूपेश बघेल ने NIA जांच पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने NIA कोर्ट के संभावित फैसले से पहले जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि NIA ने इस मामले की जांच सही तरीके से नहीं की। बघेल के मुताबिक, दरभा थाने में दर्ज FIR में जिन लोगों के नाम और धाराएं शामिल थीं, उनसे भी पर्याप्त पूछताछ नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी षड्यंत्र के पीछे मौजूद लोगों तक पहुंचने के लिए आगे नहीं बढ़ सकी।
गुडसा उसेंडी के बयान को लेकर भी सवाल
भूपेश बघेल ने दावा किया कि NIA कोर्ट ने गुडसा उसेंडी का बयान दर्ज करने को कहा था, लेकिन उनका बयान नहीं लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय मौके पर मौजूद कई लोगों से भी पूछताछ नहीं की गई। पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक, जब जांच के महत्वपूर्ण पहलुओं पर ही पूरी तरह काम नहीं हुआ, तो अदालत का फैसला भी जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
SIT जांच को लेकर सरकारों पर लगाए आरोप
भूपेश बघेल ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मध्य क्षेत्र की बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री से मामले की जांच राज्य को सौंपने का आग्रह किया था। उनका कहना है कि जब केंद्र स्तर पर जांच आगे नहीं बढ़ रही थी, तब राज्य को जांच का अवसर देने की मांग की गई, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद राज्य सरकार ने SIT गठित की तो NIA हाईकोर्ट पहुंच गई।
भाजपा सरकार पर लगाया मामले को दबाने का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की थी और वहां राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आया। हालांकि, इसी दौरान उनकी सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया। बघेल का आरोप है कि इसके बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार ने न तो जांच को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक आदेश दिए और न ही मामले में कोई प्रभावी कदम उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार मामले को दबाना चाहती है।
कांकेर में प्रशिक्षण शिविर के दौरान दिया बयान
भूपेश बघेल ने ये आरोप कांकेर में लगाए। वह बस्तर संभाग के ब्लॉक अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने के लिए वहां पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने झीरम घाटी हत्याकांड की जांच और NIA की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी। उनके बयान ने एक बार फिर इस पुराने और संवेदनशील मामले की जांच को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी हत्याकांड 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा निकाली जा रही थी। यात्रा सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रही थी। इसी दौरान दरभा इलाके की झीरम घाटी में घात लगाए नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के काफिले को निशाना बनाया था। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की हुई थी मौत
इस नक्सली हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की जान चली गई थी। बस्तर टाइगर के नाम से प्रसिद्ध महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख नेता मारे गए थे। हमले में सुरक्षा बलों के जवान भी शहीद हुए थे और आम नागरिकों की भी जान गई थी। अब सभी की नजरें 5 सितंबर को आने वाले अदालत के फैसले पर टिकी हैं।
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