Nepal Flood Alert : नेपाल में हालिया बाढ़ और भूस्खलन से हुई भारी तबाही के बाद अब एक बार फिर नदियों के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में नदी का पानी तेजी से बढ़ने के कारण प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सात जिलों के नदी किनारे बसे इलाकों के लिए नया अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम में लगातार बदलाव और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों को नदियों के आसपास जाने से बचना चाहिए।
सात जिलों में नदी किनारे रहने वालों को चेतावनी
नेपाल प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन जिलों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। इन जिलों में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे से सावधान किया गया है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे जलभराव वाले स्थानों, नदी के किनारों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है।
26 अगस्त की आपदा ने मचाई थी तबाही
नेपाल में मौजूदा संकट का संबंध 26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद आई अचानक बाढ़ से जोड़ा जा रहा है। ग्लेशियर टूटने के बाद पानी के तेज बहाव ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया। बाढ़ के साथ भूस्खलन ने भी स्थिति को गंभीर बना दिया। कई इलाकों में सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ, जबकि बड़ी संख्या में लोग इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए।
राहत अभियान के बीच बढ़ी नई चिंता
पिछली आपदा के बाद नेपाल में राहत और खोज अभियान अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बचाव दल प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं और पीड़ित परिवारों तक सहायता पहुंचाई जा रही है। इसी बीच नदियों का फिर बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए नई चुनौती बन गया है। अधिकारियों को आशंका है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो पहले से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति दोबारा गंभीर हो सकती है।
नेपाल में 1000 से ज्यादा मौतों का दावा
आपदा के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या 1000 से अधिक बताई जा रही है। वहीं तिब्बत में भी 16 लोगों की मौत की खबर है। नेपाल के चितवन जिले में सबसे अधिक शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। यहां 321 शव मिलने का दावा किया गया है। इसके अलावा 4,400 से ज्यादा लोगों के लापता होने की आशंका जताई गई है। हालांकि अंतिम आंकड़े राहत एवं बचाव अभियान पूरा होने तथा आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
खराब मौसम बना बचाव अभियान में बाधा
लगातार बारिश, भूस्खलन और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने राहत एवं बचाव दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई स्थानों पर सड़कों पर मलबा जमा होने के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुंचना कठिन हो रहा है। खराब मौसम के कारण बचाव अभियान की गति भी प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद सुरक्षाकर्मी और राहत एजेंसियां लापता लोगों की तलाश तथा प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटी हुई हैं।
नदी किनारे इलाकों पर प्रशासन की नजर
नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दे रहा है। स्थानीय स्तर पर संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर तैयारियां तेज की जा रही हैं।
नई चेतावनी ने बढ़ाई प्रशासन की जिम्मेदारी
नेपाल के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ पिछली प्राकृतिक आपदा में प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश का अभियान जारी है, तो दूसरी ओर नदियों के बढ़ते जलस्तर ने नए खतरे की आशंका पैदा कर दी है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मौसम और नदियों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि खतरा बढ़ने की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
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