Bastar Republic Day 2026 : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक ऐसी खबर सामने आई है जो न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। दशकों तक ‘लाल आतंक’ के साये में रहे बस्तर के 41 सुदूर गांवों में इस साल गणतंत्र दिवस का नजारा बदला हुआ होगा। माओवादी प्रभाव से मुक्त होने के बाद, इन गांवों के निवासी अपने जीवन में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराते हुए देखेंगे। यह ऐतिहासिक क्षण केवल एक प्रतीकात्मक कार्य नहीं है, बल्कि यह उन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की कड़ी मेहनत और प्रशासन की पहुंच का जीवंत प्रमाण है, जहाँ कभी नक्सलियों का समानांतर शासन चलता था।
जिलेवार विवरण: बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा में नई सुबह
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) सुंदरराज पी. ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए विस्तार से जानकारी दी। उनके अनुसार, इन 41 गांवों का चयन उन क्षेत्रों से किया गया है जो हाल ही में सुरक्षा घेरे में आए हैं। इनमें सबसे अधिक 18 गांव नारायणपुर जिले के हैं, जबकि 13 गांव बीजापुर और 10 गांव सुकमा जिले के शामिल हैं। ये वे क्षेत्र हैं जो वर्षों से बाहरी दुनिया और सरकारी योजनाओं से कटे हुए थे। अब इन क्षेत्रों में तिरंगा फहराना शांति और विकास के एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।
सुरक्षा शिविरों की भूमिका: विश्वास और सुशासन की बहाली
आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में इन दुर्गम इलाकों में सुरक्षा शिविरों (Security Camps) की स्थापना की गई है। इन शिविरों ने न केवल नक्सलियों की आवाजाही पर लगाम लगाई है, बल्कि स्थानीय आदिवासियों के मन में सुरक्षा और विश्वास का भाव भी पैदा किया है। पहले जहाँ डर के कारण ग्रामीण राष्ट्रीय कार्यक्रमों से दूरी बनाकर रखते थे, वहीं अब वे सक्रिय रूप से लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं का हिस्सा बन रहे हैं। प्रशासन अब इन गांवों में सुशासन, राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
धीरे-धीरे लौट रही है शांति: 54 गांवों में मनेगा गणतंत्र दिवस
विकास की यह प्रक्रिया निरंतर जारी है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 15 अगस्त को 13 गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। इस बार उन 13 गांवों के साथ 41 नए गांवों को मिलाकर कुल 54 ऐसे गांव होंगे, जो पहली बार गणतंत्र दिवस के भव्य समारोह के साक्षी बनेंगे। अबूझमाड़ और राष्ट्रीय उद्यान जैसे दुर्गम क्षेत्रों में बसवराजु और रामचंद्र रेड्डी जैसे बड़े माओवादी कैडरों को निष्क्रिय करने के बाद नक्सली संगठन काफी कमजोर हो गया है। अब भय और धमकी के स्थान पर प्रशासनिक संपर्क और विकास की बातें हो रही हैं।
राजधानी रायपुर और बिलासपुर में समारोह की भव्य तैयारियां
एक ओर जहाँ बस्तर के जंगलों में तिरंगा लहराएगा, वहीं दूसरी ओर राज्य के शहरी क्षेत्रों में भी गणतंत्र दिवस की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में राज्यपाल रमन डेका राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और विभिन्न सुरक्षा इकाइयों से ‘गार्ड ऑफ ऑर्नर’ स्वीकार करेंगे। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बिलासपुर जिले में ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों को संबोधित करेंगे। पूरे राज्य में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि हर्षोल्लास के साथ यह राष्ट्रीय पर्व मनाया जा सके।
















