Haldwani Purification : कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना को लेकर केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। खरगे ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए नड्डा से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को घटना में शामिल लोगों और संगठनों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए जाएं।
8 अगस्त की घटना को लेकर विवाद
मामला 8 अगस्त 2026 का है, जब मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक जनसभा को संबोधित किया था। आरोप है कि रैली समाप्त होने के बाद कुछ लोगों और संगठनों ने मैदान को कथित तौर पर ‘अपवित्र’ बताते हुए मंत्रोच्चार और हवन के जरिए उसका ‘शुद्धिकरण’ किया। खरगे ने इस कार्रवाई को जातिवादी और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए राज्यसभा में भी इस मुद्दे को उठाया था।
24 दिन बाद भी FIR नहीं होने पर सवाल
2 सितंबर को जेपी नड्डा को भेजे पत्र में खरगे ने कहा कि घटना को 24 दिन बीत चुके हैं, लेकिन उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन की ओर से अब तक कथित तौर पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने इसे संविधान की भावना और मानवीय मूल्यों के विपरीत बताया। खरगे के मुताबिक, किसी व्यक्ति के कार्यक्रम के बाद किसी सार्वजनिक स्थान का ‘शुद्धिकरण’ करना अस्पृश्यता और भेदभाव वाली मानसिकता को दर्शाता है।
महाड़ सत्याग्रह का किया उल्लेख
खरगे ने अपने पत्र में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के महाड़ सत्याग्रह का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाड़ आंदोलन के दौरान अंबेडकर के सार्वजनिक जलस्रोत से पानी लेने के बाद जातिवादी मानसिकता रखने वाले लोगों ने कथित तौर पर उस स्थान का ‘शुद्धिकरण’ किया था। खरगे ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ के जरिए कहा कि मंत्रोच्चार या हवन जैसी प्रक्रिया किसी भेदभावपूर्ण कृत्य को उचित या स्वीकार्य नहीं बना सकती।
खरगे बोले- मामला व्यक्तिगत अपमान तक सीमित नहीं
कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वह हल्द्वानी की घटना को केवल अपने व्यक्तिगत अपमान के तौर पर नहीं देख रहे हैं। उनके अनुसार, यह मामला देश के करोड़ों दलितों, वंचितों और शोषित वर्गों की भावनाओं से जुड़ा है। खरगे ने कहा कि समाज में ऐसी सोच रखने वाले लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होना जरूरी है, ताकि संविधान में निहित समानता और सम्मान की भावना मजबूत बनी रहे।
नड्डा के संसद में दिए आश्वासन की याद दिलाई
खरगे ने पत्र में 13 अगस्त को राज्यसभा में जेपी नड्डा द्वारा दिए गए बयान का भी हवाला दिया। नड्डा ने उस समय घटना को दुखद बताते हुए जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि भारतीय जनता पार्टी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और घटना की निंदा करती है।
उत्तराखंड सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग
खरगे ने कहा कि जब नड्डा संसद में कार्रवाई का भरोसा दे चुके हैं और राज्यसभा के सभापति ने भी घटना पर चिंता जताई थी, तो अब उत्तराखंड सरकार को कानूनी कार्रवाई के लिए तत्काल निर्देश दिए जाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि घटना में शामिल सभी कथित लोगों और संगठनों की भूमिका की जांच हो तथा कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने के संकेत
हल्द्वानी की कथित ‘शुद्धिकरण’ घटना ने राजनीतिक विवाद के साथ सामाजिक समानता और जातिगत भेदभाव को लेकर भी बहस को तेज कर दिया है। खरगे लगातार इस मुद्दे को संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर उठा रहे हैं। अब उनकी नजर नड्डा और उत्तराखंड सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है। मामले में आगे की जांच और प्रशासनिक कदम इस विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।
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