Chaturmas 2026 : चातुर्मास हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अवधि है, जो लगभग चार महीने तक चलता है। इस दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कई मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, आदि। साल 2026 में यह अवधि 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ समाप्त होगी। माना जाता है कि इस समय भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं, इसलिए शुभ कार्यों को इस समय टालना ही उचित माना जाता है। केवल देवउठनी एकादशी के बाद ही इन कार्यों को करने की अनुमति मिलती है।
चातुर्मास के दौरान बच्चे का जन्म और नामकरण संस्कार
यदि इस अवधि में किसी बच्चे का जन्म हो जाए, तो माता-पिता का सबसे बड़ा सवाल होता है कि क्या इस समय बच्चे का नामकरण संस्कार किया जा सकता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास में बड़े मांगलिक कार्य टाल दिए जाते हैं, लेकिन नामकरण संस्कार को लेकर स्थिति अलग है। शास्त्रों और विद्वानों के मत से, विशेष परिस्थिति या परंपरा के तहत चातुर्मास के दौरान भी बच्चे का नामकरण किया जा सकता है।
नामकरण संस्कार का समय और विधि
हिंदू धर्म में नामकरण संस्कार बच्चे के जन्म के 11वें या 12वें दिन किया जाता है, जब अशौच या सूतक काल समाप्त हो चुका हो। यदि यह शुभ अवसर चातुर्मास में आए, तो भी इसे सामान्य रूप से किया जा सकता है। यदि कोई बड़ा आयोजन या भव्य समारोह करना हो, तो उसे देवउठनी एकादशी के बाद टालना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, जन्म के 11वें, 12वें, 16वें दिन या किसी भी शुभ नक्षत्र और मुहूर्त में नामकरण किया जा सकता है।
नामकरण संस्कार की विधि
1. घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थान तय करें।
2. माता और बच्चे को स्नान कराएं।
3. भगवान गणेश, कुलदेवता और नक्षत्र के देवताओं का आह्वान कर पूजा और हवन करें।
4. पंडित से बच्चे के जन्म नक्षत्र और नामाक्षर का परामर्श लें।
5. पिता या परिवार के बड़े बुजुर्ग बच्चे के दाहिने कान में नाम का उच्चारण तीन बार करें।
6. नाम की घोषणा कर बच्चे को आशीर्वाद दें।
7. अंत में आरती और प्रसाद वितरण करें।
शुभ तिथियां, वार और नक्षत्र
– **शुभ तिथियां:** द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा।
– **वर्जित तिथियां:** चतुर्थी, नवमी, और चतुर्दशी।
– **शुभ वार:** सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार।
– **शुभ नक्षत्र:** रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, अश्विनी, रेवती।
2026 में नामकरण के शुभ मुहूर्त
सितंबर 2026 में कई शुभ मुहूर्त हैं, जिनमें से प्रमुख हैं:
– 2 सितंबर (बुधवार): सुबह 07:14 से 3 सितंबर रात 02:44 तक।
– 6 सितंबर (रविवार): सुबह 07:14 से 7 सितंबर रात 02:23 तक।
– 9 सितंबर (बुधवार): सुबह 07:14 से 10 सितंबर रात 02:56 तक।
– 13 सितंबर (रविवार): सुबह 07:14 से 14 सितंबर रात 02:44 तक।
– 17 सितंबर (गुरुवार): सुबह 07:14 से दोपहर 02:23।
– 21 सितंबर (सोमवार): सुबह 07:14 से दोपहर 02:44।
– 25 सितंबर (शुक्रवार): सुबह 07:14 से दोपहर 02:56।
चातुर्मास का समय धार्मिक मान्यताओं में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यदि इस समय बच्चे का जन्म होता है, तो भी शास्त्रों के अनुसार नामकरण संस्कार बिना किसी संकोच के किया जा सकता है। शुभ मुहूर्त पर ध्यान देना और अनुभवी पंडितों से सलाह लेना आवश्यक है, ताकि यह संस्कार विधि-विधान से सम्पन्न हो सके।
Read More : CG ACB Action: 10 हजार की रिश्वत लेते प्रिंसिपल और बाबू गिरफ्तार, एरियर भुगतान के बदले मांगी थी रकम