Karnataka News: कर्नाटक में सूखे की स्थिति को देखते हुए उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता डी.के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार से किसानों के कृषि ऋण माफ करने की मांग की है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों को मौजूदा संकट से राहत देने के लिए केंद्र को आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। शिवकुमार ने इस मुद्दे पर सभी दलों को साथ आने की अपील भी की है।
भाजपा नेताओं से दिल्ली चलने की अपील
डी.के. शिवकुमार ने भाजपा नेताओं से अपील की कि वे किसानों की कर्जमाफी की मांग को केंद्र सरकार के सामने रखने के लिए उनके साथ दिल्ली चलें। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक से इस मुद्दे पर सहयोग करने का आग्रह किया। शिवकुमार ने कहा कि कृषि ऋण माफी पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाना है।
सूखा प्रभावित जिलों के दौरे पर निकले शिवकुमार
शिवकुमार शुक्रवार को बागलकोट और विजयनगर जिलों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे से पहले पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों की स्थिति गंभीर है और इस विषय पर व्यापक चर्चा की जरूरत है। उनके मुताबिक हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र के दौरान किसानों और सूखे की स्थिति पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी, इसलिए विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया।
विधानसभा सत्र में चर्चा नहीं होने का मुद्दा उठाया
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान सूखे के मुद्दे पर चर्चा का अवसर नहीं मिलने से भाजपा और जेडी(एस) के कई विधायक भी नाराज थे। कांग्रेस के विधायकों ने भी किसानों और सूखे से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई थी। शिवकुमार ने कहा कि किसानों की समस्याओं पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को मिलकर समाधान तलाशना चाहिए।
केंद्र से आर्थिक सहायता की मांग
शिवकुमार ने कहा कि उनकी सरकार किसानों की मदद करना चाहती है, लेकिन इस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार की आर्थिक सहायता भी जरूरी है। उन्होंने कृषि ऋण माफी के लिए केंद्र से विशेष सहयोग देने की मांग की। मुख्यमंत्री स्तर पर उठाए जा रहे इस मुद्दे को किसानों को तत्काल राहत दिलाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली ले जाने का सुझाव
कांग्रेस नेता ने कहा कि किसानों की कर्जमाफी को लेकर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली ले जाने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि यदि सभी राजनीतिक दल एक साथ केंद्र सरकार के सामने किसानों की मांग रखते हैं, तो इस मुद्दे पर दबाव बढ़ेगा। उन्होंने भाजपा नेताओं से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर किसानों के हित में साथ आने का आग्रह किया।
विजयेंद्र के पुराने बयान का दिया हवाला
डी.के. शिवकुमार ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र के उस रुख का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कृषि ऋण माफी की मांग की थी। शिवकुमार ने कहा कि जब भाजपा नेता भी किसानों की कर्जमाफी की बात कर चुके हैं, तो उन्हें केंद्र सरकार के सामने इस मांग को मजबूती से उठाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर से राज्य में सूखे की स्थिति स्वीकार किए जाने का भी जिक्र किया।
पार्क विधेयक वापस लेने के फैसले का बचाव
किसानों के मुद्दे के साथ शिवकुमार ने विवादित पार्क विधेयक को वापस लेने के अपनी सरकार के फैसले का भी बचाव किया। इस विधेयक में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और जनहित से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पार्कों तथा बगीचों की पांच प्रतिशत भूमि के उपयोग का प्रावधान था। सरकार के फैसले को भाजपा द्वारा अपनी जीत बताए जाने पर शिवकुमार ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा पर लगाया विकास विरोधी होने का आरोप
शिवकुमार ने पार्क विधेयक वापस लिए जाने को भाजपा की जीत बताने की आलोचना करते हुए पार्टी पर विकास विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु की मौजूदा समस्याओं के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उनके मुताबिक शहर में बुनियादी ढांचे से जुड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए व्यावहारिक नीतियों और बेहतर योजना की आवश्यकता है।
किसानों के मुद्दे पर सर्वदलीय एकजुटता की अपील
शिवकुमार के बयान से स्पष्ट है कि कर्नाटक सरकार सूखे की स्थिति में किसानों को राहत दिलाने के लिए केंद्र की मदद चाहती है। उन्होंने विपक्षी दलों से भी इस मामले में सहयोग मांगा है। अब देखना होगा कि कृषि ऋण माफी और सूखा राहत को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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