Bittu Tabahi : मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा निवासी युवा सुरेंद्र सिंह चौधरी इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से मशहूर सुरेंद्र ने बेहद प्रदूषित अजनार नदी को साफ करने का बीड़ा उठाया। नदी की गंदगी और प्लास्टिक कचरे के बीच लगातार मेहनत कर उन्होंने सफाई अभियान चलाया। उनके असाधारण प्रयासों की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है।
अकेले शुरू किया नदी को साफ करने का मिशन
सुरेंद्र सिंह चौधरी बीएससी के छात्र हैं और उन्होंने 26 जनवरी 2026 से अजनार नदी की सफाई शुरू की थी। शुरुआती दौर में उनके कुछ दोस्तों ने भी इस अभियान में उनका साथ दिया, लेकिन काम की कठिन परिस्थितियों के कारण धीरे-धीरे वे पीछे हट गए। इसके बाद सुरेंद्र ने अकेले ही अपना अभियान जारी रखा और गंदे पानी, जहरीली काई तथा प्लास्टिक कचरे के बीच उतरकर नदी की सफाई करते रहे।
तीन महीने से ज्यादा की मेहनत से बदली नदी की तस्वीर
सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरेंद्र ने अजनार नदी के अलग-अलग घाटों की सफाई के लिए अपनी जेब से करीब 30 हजार रुपये खर्च किए। उन्होंने तीन महीने से अधिक समय तक लगातार मेहनत की। इस दौरान उन्होंने नदी में जमा प्लास्टिक, कचरा और अन्य प्रदूषित सामग्री को हटाने का काम किया। सफाई के बाद नदी की तस्वीर में आया बदलाव लोगों को काफी प्रभावित कर रहा है।
सोशल मीडिया पोस्ट ने दिलाया अंतरराष्ट्रीय पहचान
सुरेंद्र की मेहनत उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गई, जब उनकी नदी सफाई से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गईं। पोस्ट में अजनार नदी की सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें दिखाई गई थीं। दोनों तस्वीरों के बीच का अंतर देखकर लोग हैरान रह गए। इसी पोस्ट पर नीदरलैंड के पर्यावरणविद् और आविष्कारक बोयन स्लैट की नजर पड़ी।
Boyan Slat ने दिया काम करने का सीधा ऑफर
अजनार नदी को साफ करने के सुरेंद्र के प्रयास से प्रभावित होकर द ओशन क्लीनअप के संस्थापक और सीईओ बोयन स्लैट ने सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सुरेंद्र को अपनी संस्था के साथ काम करने का प्रस्ताव दिया। उनका यह ऑफर सामने आने के बाद ‘बिट्टू तबाही’ की कहानी सोशल मीडिया पर और तेजी से वायरल होने लगी। एक छोटे शहर के युवा की मेहनत को अंतरराष्ट्रीय मंच से मिली यह पहचान खास मानी जा रही है।
शुरुआत में लोगों ने किया था ट्रोल
सुरेंद्र को अपने अभियान की शुरुआत में आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वह केवल सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज हासिल करने के लिए नदी सफाई का काम कर रहे हैं। हालांकि, सुरेंद्र ने आलोचनाओं पर ध्यान देने के बजाय अपना काम जारी रखा। उनकी लगातार मेहनत और नदी की बदली तस्वीर ने आलोचकों को भी जवाब दिया।
आनंद महिंद्रा ने भी की थी तारीफ
बिट्टू तबाही के प्रयासों की देश के जाने-माने उद्योगपति आनंद महिंद्रा भी सराहना कर चुके हैं। मार्च 2026 में उन्होंने X पर सुरेंद्र की तारीफ करते हुए कहा था कि अगर लाइक्स पाने की इच्छा समाज के भले का माध्यम बन सकती है, तो इसमें कोई समस्या नहीं है। उन्होंने ब्यावरा के बिट्टू तबाही को अपना #MondayMotivation भी बताया था।
क्या करती है द ओशन क्लीनअप संस्था?
‘द ओशन क्लीनअप’ नीदरलैंड की एक गैर-सरकारी पर्यावरण संस्था है, जो महासागरों और नदियों में मौजूद प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए तकनीक विकसित करती है। संस्था का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के जरिए जल स्रोतों से प्लास्टिक कचरे को हटाना है। इसका लक्ष्य वर्ष 2040 तक समुद्रों में मौजूद तैरते प्लास्टिक कचरे का 90 प्रतिशत तक साफ करना है।
छोटे शहर के युवा ने पेश की बड़ी मिसाल
बिट्टू तबाही की कहानी दिखाती है कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े संगठन या सरकारी तंत्र से ही हो, यह जरूरी नहीं है। एक युवा ने अपने स्तर पर पहल की, आलोचनाओं का सामना किया और लगातार मेहनत करके लोगों का ध्यान पर्यावरण संरक्षण की ओर खींचा। अजनार नदी की सफाई से शुरू हुआ उनका अभियान अब अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर चुका है और उन्हें दुनिया की चर्चित पर्यावरण संस्था से काम करने का प्रस्ताव भी मिला है।
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