IRCTC Money Laundering Case : दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रसाद यादव समेत कुल नौ आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का निर्देश दिया है। अदालत के आदेश के बाद अब इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की अगली कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इन नौ आरोपियों के खिलाफ होंगे आरोप तय
अदालत के मुताबिक, जिन नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे, उनमें एम/एस लारा प्रोजेक्ट एलएलपी, राबड़ी देवी, तेजस्वी प्रसाद यादव, लालू प्रसाद यादव, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, एम/एस सुजाता होटल्स, विनय कोचर और विजय कोचर शामिल हैं। कोर्ट ने मामले में सामने आए दस्तावेजों, कथित लेनदेन और जांच से जुड़े तथ्यों को देखते हुए प्रथम दृष्टया आरोपों पर आगे सुनवाई को उचित माना है।
सात आरोपियों को अदालत से मिली राहत
इसी मामले में अदालत ने सात आरोपियों को डिस्चार्ज यानी आरोपों से मुक्त कर दिया है। इनमें गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलश्यान, राजीव कुमार रेलन और एम/एस अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन सात आरोपियों के खिलाफ इस मामले में आगे आरोप तय नहीं किए जाएंगे।
संदिग्ध सौदों को लेकर कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से शिकायत और गवाहों से संबंधित दलीलें भी रखी गई थीं। हालांकि, अदालत ने इस आधार पर मामले को कमजोर मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में कुछ कथित संदिग्ध लेनदेन ऐसे हैं, जो खुले तौर पर किए गए दिखाई देते हैं। अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रथम दृष्टया आधार माना।
परिवार के नाम पर अपराध की कमाई का आरोप
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसी मजबूत आशंका मौजूद है कि अपराध से अर्जित रकम से संपत्ति या आर्थिक लाभ तैयार किया गया और उसका फायदा परिवार के सदस्यों के नाम पर उठाया गया। कोर्ट की इस टिप्पणी को मामले में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं और आरोप तय होना किसी आरोपी को दोषी साबित नहीं करता।
लालू यादव की भूमिका पर कोर्ट ने जताया संदेह
आरोप तय करने के आधार पर अदालत ने लालू प्रसाद यादव की भूमिका को लेकर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि लारा प्रोजेक्ट को जिस तरीके से कथित तौर पर फायदा पहुंचा, उससे लालू यादव की भूमिका पर प्रथम दृष्टया संदेह पैदा होता है। अदालत ने जांच से जुड़े तथ्यों और लेनदेन की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपों पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत बताई है।
जांच राजनीतिक रूप से प्रेरित नहीं: कोर्ट
अदालत ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ हुई जांच को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताए जाने की दलील को भी स्वीकार नहीं किया। कोर्ट के अनुसार, उपलब्ध सामग्री को देखते हुए प्रथम दृष्टया यह नहीं कहा जा सकता कि जांच राजनीतिक प्रभाव में की गई थी। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रखने का रास्ता साफ किया।
तीन अक्टूबर को होगी औपचारिक चार्ज फ्रेमिंग
राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी नौ आरोपियों को 3 अक्टूबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। इसी दिन उनके खिलाफ आरोपों की औपचारिक रूप से चार्ज फ्रेमिंग की जाएगी। इसके बाद मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू होगी। फिलहाल अदालत के इस आदेश के बाद IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है।
मामले में आगे की सुनवाई पर नजर
लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े इस मामले में अदालत के आदेश के बाद राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा तेज होने की संभावना है। हालांकि, अदालत द्वारा आरोप तय करने का आदेश केवल प्रथम दृष्टया आधार पर है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और आगे होने वाली सुनवाई के बाद ही होगी। अब 3 अक्टूबर की सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी।
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