छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के औद्योगिक क्षेत्र में एक भीषण दुर्घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के खरसिया स्थित ‘मंगल कार्बन प्लांट’ में पुराने टायरों को गलाने की प्रक्रिया के दौरान एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ। यह हादसा उस समय हुआ जब प्लांट के भीतर रिसाइक्लिंग का काम चल रहा था। विस्फोट इतना जोरदार था कि इसकी आवाज काफी दूर तक सुनाई दी और पूरे परिसर में दहशत फैल गई। इस घटना में आठ लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है।
9 महीने की मासूम भी चपेट में: घायलों की स्थिति अत्यंत नाजुक
इस त्रासदी की सबसे हृदयविदारक बात यह है कि घायलों में न केवल श्रमिक शामिल हैं, बल्कि एक 9 महीने की मासूम बच्ची भी इस भयानक आग की शिकार हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके के साथ ही वहां गर्म गैस और आग की लपटें तेजी से फैलीं, जिससे पास में मौजूद लोग संभल भी नहीं पाए। सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज 70 से 80 प्रतिशत तक जल चुके हैं। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें लाइफ सपोर्ट और विशेष बर्न यूनिट में रखा गया है।
रिसाइक्लिंग प्रक्रिया में तकनीकी चूक: आखिर कैसे हुआ यह भयानक ब्लास्ट?
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, प्लांट में पुराने टायरों से तेल और अन्य पदार्थ निकालने के लिए उन्हें उच्च तापमान पर गलाया जा रहा था। इसी रिसाइक्लिंग प्रक्रिया के दौरान दबाव (Pressure) अनियंत्रित हो गया या किसी तकनीकी खराबी के कारण बॉयलर या कंटेनर फट गया। हालांकि, प्लांट प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। विशेषज्ञ यह जांच कर रहे हैं कि क्या यह कोई मानवीय भूल थी या मशीनों के रखरखाव में की गई लापरवाही का परिणाम।
प्रशासनिक मुस्तैदी: पुलिस और सुरक्षा टीमें घटना स्थल पर तैनात
धमाके की सूचना मिलते ही पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुँच गए। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से पूरे प्लांट परिसर को सील कर दिया है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। फिलहाल प्राथमिकता घायलों की जान बचाना है, जिसके बाद घटना के कारणों की विस्तृत फोरेंसिक जांच की जाएगी।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल: क्या नियमों को ताक पर रखकर चल रहा था प्लांट?
इस दुर्घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। प्रशासनिक अधिकारी अब इस बात की सूक्ष्मता से जांच कर रहे हैं कि मंगल कार्बन प्लांट में सुरक्षा मानकों (Safety Standards) का पालन किया जा रहा था या नहीं। क्या वहां अग्नि सुरक्षा उपकरण और दबाव नियंत्रण प्रणाली चालू हालत में थी? यह भी जांच का विषय है कि औद्योगिक परिसर में एक मासूम बच्ची की मौजूदगी कैसे हुई और क्या वहां रिहायशी नियमों का उल्लंघन हो रहा था।
मुआवजे और कार्रवाई की मांग: आक्रोश में स्थानीय ग्रामीण और परिजन
हादसे के बाद से ही घायलों के परिजनों और स्थानीय लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों की मांग है कि लापरवाह प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाए। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी मामले को संज्ञान में लिया है और राजस्व विभाग की एक टीम को नुकसान का आकलन करने का जिम्मा सौंपा है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्षेत्र की अन्य औद्योगिक इकाइयों के ऑडिट की मांग भी तेज हो गई है।
















