Ambikapur Crime : अंबिकापुर शहर के बौरीपारा तालाब के पास IPS अधिकारी रवि कुर्रे के बेटे के साथ मारपीट और चाकू से हमला किए जाने के मामले में कोतवाली पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को कोतवाली थाने से जिला न्यायालय तक पैदल ले जाकर पेश किया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद शहर में मामला चर्चा का विषय बन गया है।
नाम लेने की बात को लेकर शुरू हुआ था विवाद
जानकारी के मुताबिक, बौरीपारा तालाब के पास कुछ दिनों पहले नाम लेने की मामूली बात को लेकर विवाद शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान मामला धीरे-धीरे बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। आरोप है कि इसी दौरान दोनों आरोपियों ने IPS अधिकारी के बेटे के साथ मारपीट की और चाकू से हमला कर दिया।
शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
घटना के बाद पीड़ित पक्ष की ओर से कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करने के बाद दोनों संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
थाने से न्यायालय तक पैदल ले जाए गए आरोपी
गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों आरोपियों को कोतवाली थाने से जिला न्यायालय तक पैदल लेकर गई। इस दौरान रास्ते में लोगों की भीड़ भी दिखाई दी। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोग इसे पुलिस की सख्ती के तौर पर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई को लेकर शहर में चर्चा
दोनों आरोपियों को पैदल न्यायालय ले जाने के बाद शहर में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई। कुछ लोगों का कहना है कि अंबिकापुर में मारपीट और अन्य आपराधिक घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन प्रत्येक मामले में आरोपियों को इसी तरह सार्वजनिक रूप से पैदल ले जाते हुए नहीं देखा जाता। इसी वजह से इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
क्या प्रभावशाली मामलों में दिखती है ज्यादा सख्ती?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या पुलिस की ऐसी सख्त कार्रवाई केवल उन मामलों में देखने को मिलती है, जिनमें किसी प्रभावशाली व्यक्ति या पुलिस परिवार से जुड़े लोग शामिल होते हैं। हालांकि, इस सवाल के संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। इसलिए इस पहलू को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना फिलहाल उचित नहीं होगा।
अनुराग सिंहदेव के भतीजे से मारपीट का मामला भी चर्चा में
इसी बीच शहर में हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव के भतीजे के साथ हुई कथित मारपीट की घटना का मामला भी चर्चा में है। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि इस मामले में आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं। इसी तुलना के आधार पर लोग पुलिस की कार्रवाई के तरीके और गति को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
अलग-अलग मामलों में कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कानून सभी मामलों में समान रूप से लागू होना चाहिए और अपराध की गंभीरता के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे में पुलिस से अपेक्षा की जा रही है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी हो या दर्ज मामलों में जांच, हर मामले में समान प्रक्रिया और तत्परता दिखाई दे। हालांकि, प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होने के कारण सीधे तौर पर तुलना करना भी जांच पूरी होने के बाद ही उचित होगा।
पुलिस ने कार्रवाई का कारण सार्वजनिक नहीं किया
फिलहाल दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और उन्हें न्यायालय में पेश किया गया है। आरोपियों को थाने से अदालत तक पैदल ले जाने के पीछे पुलिस का आधिकारिक उद्देश्य क्या था, इसे लेकर फिलहाल कोई अलग स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अब पुलिस की आगे की जांच और न्यायालय की प्रक्रिया पर सभी की नजर है।
अन्य मामलों में पुलिस की कार्रवाई पर भी नजर
इस घटना के बाद अंबिकापुर में पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस शहर में लंबित और अन्य आपराधिक मामलों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर कितनी तेजी दिखाती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मौजूदा मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है।
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