Dhiraj Bommadevara : भारतीय तीरंदाजी के लिए रविवार का दिन बेहद खास रहा। शीर्ष रैंकिंग वाले भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवर ने मैक्सिको के साल्टिलो में आयोजित विश्व कप फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। उन्होंने खिताबी मुकाबले में जापान के नाकानिशी जुन्या को रोमांचक शूट-ऑफ में मात दी। इस जीत के साथ धीरज ने भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।
शूट-ऑफ में नाकानिशी को दी रोमांचक शिकस्त
विश्व रैंकिंग में 10वें स्थान पर मौजूद 25 वर्षीय धीरज का सामना फाइनल में विश्व नंबर 20 जापानी तीरंदाज नाकानिशी जुन्या से हुआ। मुकाबला शुरुआत से ही बेहद कांटेदार रहा और दोनों खिलाड़ियों के बीच लगातार कड़ी टक्कर देखने को मिली। पांच सेट के बाद दोनों का स्कोर 5-5 की बराबरी पर पहुंच गया। इसके बाद मुकाबले का फैसला शूट-ऑफ से हुआ।
आखिरी तीर में धीरज ने दिखाया धैर्य
शूट-ऑफ में धीरज ने शानदार संयम और सटीक निशाने का परिचय दिया। उन्होंने 10 अंक हासिल किए, जबकि नाकानिशी 9 अंक ही जुटा सके। इस तरह धीरज ने शूट-ऑफ 10-9 से जीतकर फाइनल अपने नाम कर लिया। इससे पहले पांच सेटों में स्कोर 28-28, 28-29, 29-28, 28-30 और 28-27 रहा। पूरे मुकाबले में दोनों तीरंदाजों के बीच मामूली अंतर ही देखने को मिला।
16 साल बाद भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी को बड़ी सफलता
धीरज बोम्मादेवर की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी को विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक के लिए लंबे समय से इंतजार था। धीरज ने इस 16 साल के इंतजार को खत्म कर दिया। इससे पहले जयंत तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग में विश्व कप फाइनल में कांस्य पदक हासिल किया था। अब धीरज ने स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी को नई ऊंचाई दी है।
2023 और 2024 की निराशा को पीछे छोड़ा
धीरज के लिए यह जीत व्यक्तिगत रूप से भी काफी मायने रखती है। 2023 और 2024 के सत्र में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी, लेकिन इस बार उन्होंने शानदार वापसी करते हुए अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। विश्व स्तर के दबाव वाले मुकाबले में धीरज ने अपनी तकनीक, एकाग्रता और मानसिक मजबूती का बेहतरीन प्रदर्शन किया।
विश्व कप फाइनल में भारत का गौरव बढ़ाया
विश्व कप फाइनल के इतिहास में धीरज अब स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय तीरंदाजी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और बड़ी पहचान दिलाई है। इससे पहले महिला वर्ग में डोला बनर्जी भारत के लिए यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने 2007 में दुबई में महिला व्यक्तिगत वर्ग का स्वर्ण पदक जीता था।
दीपिका कुमारी के नाम सबसे ज्यादा पदक
विश्व कप फाइनल में भारत की ओर से सर्वाधिक पदक जीतने का रिकॉर्ड दिग्गज तीरंदाज दीपिका कुमारी के नाम दर्ज है। उन्होंने आठ बार इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और पांच रजत पदक तथा एक कांस्य पदक अपने नाम किया। अब धीरज की ऐतिहासिक स्वर्णिम उपलब्धि भारतीय तीरंदाजी की इस गौरवशाली सूची में नया अध्याय जोड़ चुकी है।
भारतीय तीरंदाजी के लिए नई उम्मीद
धीरज बोम्मादेवर की जीत सिर्फ एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है। यह भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी के लिए लंबे इंतजार के बाद मिली बड़ी सफलता है। 25 वर्षीय धीरज ने दबाव भरे फाइनल में जिस तरह शूट-ऑफ जीतकर इतिहास रचा, उससे भारतीय तीरंदाजी के भविष्य को लेकर उम्मीदें और मजबूत हुई हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत के आत्मविश्वास को भी बढ़ा सकती है।
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