BRICS Summit Success : भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS Summit 2026 के सफल समापन के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों और सदस्य देशों के बीच बनी सहमतियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस बार का शिखर सम्मेलन ऐसे दौर में आयोजित हुआ, जब दुनिया गंभीर भू-राजनीतिक तनाव से गुजर रही है और दो बड़े संघर्ष अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बने हुए हैं। इसके बावजूद BRICS देशों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा रुख बनाने में सफलता हासिल की।
आतंकवाद के खिलाफ BRICS देशों का स्पष्ट रुख
जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर बनी सहमति को सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि BRICS देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट रूप से निंदा की। भारत के विदेश मंत्री के अनुसार, संगठन ने आतंकवादी गतिविधियों को आपराधिक और अस्वीकार्य माना तथा आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की आवश्यकता पर जोर दिया।
पहलगाम आतंकी हमले की BRICS ने की निंदा
विदेश मंत्री ने बताया कि BRICS देशों ने 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकवादी हमले की स्पष्ट शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि संगठन के साझा रुख में सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ सख्त संदेश दिया गया। भारत के लिए यह सहमति इसलिए महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि पहलगाम हमले के बाद आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की भारत की कोशिश लगातार जारी रही है।
आतंकवाद पर डबल स्टैंडर्ड स्वीकार नहीं होगा
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद से मुकाबले में किसी भी तरह के दोहरे मानदंड को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करते समय सभी देशों के लिए एक समान दृष्टिकोण होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक और रणनीतिक हित रखने वाले देशों का आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख पर सहमत होना BRICS के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
ध्रुवीकृत दुनिया के बीच आयोजित हुआ सम्मेलन
विदेश मंत्री ने BRICS Summit 2026 की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समय दुनिया काफी ज्यादा ध्रुवीकृत है। कई देशों के बीच गंभीर मतभेद हैं और दो बड़े संघर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। इसके बावजूद भारत ने अलग-अलग विचार रखने वाले देशों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। जयशंकर के अनुसार, सम्मेलन की सफलता भारत की संवाद और कूटनीति की क्षमता को दर्शाती है।
पश्चिम एशिया संघर्ष पर भी बनी साझा समझ
जयशंकर ने पश्चिम एशिया यानी मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को सम्मेलन के सबसे कठिन मुद्दों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि BRICS बैठक के दौरान इस विषय पर सदस्य देशों के बीच एक साझा समझ विकसित हुई। सम्मेलन में जारी बयान में शांति, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया गया तथा लंबे समय तक टिकने वाली शांति की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई।
नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर
विदेश मंत्री के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष के संदर्भ में आम नागरिकों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा रही। BRICS देशों ने नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही संघर्ष के व्यापक प्रभावों को देखते हुए वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने की जरूरत पर भी ध्यान दिया गया।
32 प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी रही खास
जयशंकर ने सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधिमंडलों की संख्या का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, BRICS Summit 2026 में कुल 32 प्रतिनिधिमंडल पहुंचे। इनमें 11 सदस्य देशों, 10 पार्टनर देशों, चार क्षेत्रीय संगठनों और सात अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी भागीदारी भारत की अलग-अलग देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को एक मंच पर लाने की क्षमता को दिखाती है।
राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों की रही मौजूदगी
विदेश मंत्री ने कहा कि सम्मेलन में पहुंचे अधिकांश प्रतिनिधिमंडल राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख के स्तर के थे। उनके अनुसार, यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी स्वीकार्यता का संकेत है। भारत की अध्यक्षता में इतने व्यापक स्तर पर प्रतिनिधियों की भागीदारी को उन्होंने सम्मेलन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना।
अलग विचारों वाले नेताओं के बीच हुआ संवाद
जयशंकर ने BRICS सम्मेलन के दौरान नेताओं के बीच हुए संवाद को भी खास बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभिन्न देशों के नेताओं के बीच खुले और सहज संवाद के अवसर भी बने। ऐसे कई नेता एक ही मंच पर आए, जो सामान्य परिस्थितियों में शायद सीधे बातचीत का अवसर नहीं पाते। BRICS ने उन्हें संवाद के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराया।
मोदी के संवाद और कूटनीति संदेश का किया जिक्र
विदेश मंत्री ने सम्मेलन की सफलता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डायलॉग, डिप्लोमेसी और डेवलपमेंट’ यानी संवाद, कूटनीति और विकास के संदेश से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि BRICS में अलग-अलग देशों के नेताओं की मौजूदगी और उनके बीच बातचीत इस बात का उदाहरण है कि गंभीर मतभेदों के बावजूद संवाद के जरिए आगे बढ़ने का रास्ता निकाला जा सकता है।
आलोचनाओं पर जयशंकर ने दिया जवाब
BRICS Summit 2026 के आयोजन को लेकर शुरुआती आशंकाओं और आलोचनाओं का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि कई लोगों ने पहले दावा किया था कि यह सम्मेलन सफलतापूर्वक नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि भारत ने न केवल इसका आयोजन किया, बल्कि नई दिल्ली में सम्मेलन को सफलतापूर्वक संपन्न भी कराया। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आयोजित यह सम्मेलन दिखाता है कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी भारत विभिन्न देशों को एक मंच पर लाकर संवाद और सहमति की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
भारत की कूटनीतिक क्षमता को मिली नई पहचान
जयशंकर के बयान के मुताबिक, BRICS Summit 2026 भारत के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं रहा, बल्कि वैश्विक तनाव के बीच संवाद और सहमति कायम करने की उसकी क्षमता को प्रदर्शित करने वाला मंच भी बना। आतंकवाद, पश्चिम एशिया संघर्ष, नागरिक सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर साझा समझ बनाने की कोशिशों ने भारत की कूटनीतिक भूमिका को रेखांकित किया। अब सम्मेलन में बनी सहमतियों को लागू करने और BRICS के साझा एजेंडे को आगे बढ़ाने पर नजर रहेगी।
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