Heart Attack Symptoms : हार्ट अटैक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिल तक रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली धमनियों में रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज मिलने से दिल की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, मितली या हाथ, पीठ, गर्दन और जबड़े तक फैलने वाला दर्द महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सीने में दबाव और बाएं हाथ का दर्द हो तो रहें सतर्क
हार्ट अटैक का दर्द हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। कई लोगों को सीने में दबाव, जकड़न या भारीपन महसूस हो सकता है, जबकि दर्द कंधे, एक या दोनों हाथों, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है। इसके साथ सांस फूलना, जी मिचलाना, चक्कर, पसीना या असामान्य थकान भी हो सकती है। ऐसे लक्षणों को गैस या हार्टबर्न समझकर इंतजार करना जोखिम भरा हो सकता है।
पहला कदम: तुरंत एंबुलेंस या इमरजेंसी सेवा को फोन करें
हार्ट अटैक का संदेह होते ही सबसे पहले स्थानीय इमरजेंसी मेडिकल सेवा को कॉल करना चाहिए। यह इंतजार न करें कि दर्द अपने आप ठीक हो जाएगा। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की गाइडलाइन के अनुसार, सीने में अचानक या गंभीर दर्द होने पर इमरजेंसी मेडिकल सर्विस को सक्रिय करना प्राथमिक कदम है। मरीज को खुद वाहन चलाकर अस्पताल जाने से बचना चाहिए; संभव हो तो एंबुलेंस की मदद लेनी चाहिए।
एस्पिरिन लेने से पहले जरूरी सावधानी रखें
हार्ट अटैक के संदेह में एस्पिरिन कुछ मरीजों के लिए उपयोगी हो सकती है, क्योंकि यह रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को कम करती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की 2024 फर्स्ट-एड गाइडलाइन के अनुसार, होश में मौजूद ऐसे वयस्क जिन्हें गैर-चोट संबंधी सीने में दर्द हो, उन्हें 162 से 325 मिलीग्राम एस्पिरिन चबाकर निगलने की सलाह दी जा सकती है, बशर्ते उन्हें एस्पिरिन से एलर्जी न हो और किसी स्वास्थ्यकर्मी ने इसे लेने से मना न किया हो। अगर कोई संदेह हो तो मेडिकल सहायता आने तक एस्पिरिन न लेने का विकल्प उचित है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एस्पिरिन लेने के लिए इमरजेंसी कॉल में देरी नहीं करनी चाहिए।
मरीज को अकेला न छोड़ें और अनावश्यक गतिविधि से बचें
इमरजेंसी सहायता आने तक मरीज को सुरक्षित और आरामदायक स्थिति में रखें। उसे अनावश्यक रूप से चलने-फिरने या खुद वाहन चलाकर अस्पताल जाने के लिए न कहें। अगर डॉक्टर ने पहले से नाइट्रोग्लिसरीन जैसी दवा लिखी है, तो उसे उसी निर्देश के अनुसार लिया जा सकता है। किसी दूसरे व्यक्ति की दवा मरीज को अपनी ओर से नहीं देनी चाहिए।
महिला मरीजों में लक्षण अलग तरीके से दिख सकते हैं
महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण हमेशा केवल तेज सीने के दर्द तक सीमित नहीं होते। मितली, सांस फूलना, असामान्य थकान, चक्कर, गर्दन या जबड़े में दर्द, पीठ या कंधे में परेशानी और पसीना जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं। कुछ महिलाओं में सीने का दर्द हल्का हो सकता है या प्रमुख लक्षण कोई दूसरा हो सकता है। इसलिए इन संकेतों को तनाव, थकान या अपच समझकर टालना उचित नहीं है।
अगर मरीज बेहोश हो जाए तो तुरंत CPR शुरू करें
यदि हार्ट अटैक की आशंका वाले व्यक्ति की सांस सामान्य नहीं है या वह बेहोश हो गया है, तो तुरंत इमरजेंसी सेवा को सूचना दें और जरूरत पड़ने पर CPR शुरू करें। प्रशिक्षित व्यक्ति CPR दे सकता है। अगर CPR का प्रशिक्षण नहीं है, तो इमरजेंसी ऑपरेटर के निर्देशों के अनुसार हाथों से छाती पर दबाव देने वाली CPR की जा सकती है। ऐसी स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है।
इन लक्षणों को कभी सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें
सीने में नया या अस्पष्ट दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, मितली, चक्कर या हाथ, पीठ, गर्दन और जबड़े में फैलने वाला दर्द हार्ट अटैक के संभावित संकेत हो सकते हैं। लक्षण हल्के हों तब भी उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर इमरजेंसी सहायता लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। याद रखें, शुरुआती उपचार में देरी दिल को होने वाले नुकसान को बढ़ा सकती है, इसलिए संदेह होने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
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