Types of Hemorrhoids : बवासीर यानी हेमोरॉयड गुदा और मलाशय के निचले हिस्से में मौजूद नसों के सूजने या फूलने की स्थिति है। यह समस्या काफी आम मानी जाती है और किसी भी उम्र में परेशान कर सकती है। बवासीर होने पर मल त्याग के दौरान दर्द, जलन, खुजली, सूजन या खून आने जैसी शिकायत हो सकती है। कई मामलों में शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समस्या बढ़ने पर परेशानी ज्यादा गंभीर हो सकती है।
बवासीर के कितने मुख्य प्रकार होते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार बवासीर को मुख्य रूप से दो प्रकारों में बांटा जाता है—आंतरिक बवासीर और बाहरी बवासीर। दोनों के लक्षण और परेशानी की प्रकृति अलग हो सकती है। फोर्टिस हॉस्पिटल, मानेसर के महानिदेशक सर्जरी डॉ. राकेश कुमार ने बवासीर के इन प्रकारों और इससे जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में जानकारी दी है।
आंतरिक बवासीर में कहां होती है समस्या?
आंतरिक बवासीर मलाशय के अंदर विकसित होती है। शुरुआती अवस्था में इसमें आमतौर पर तेज दर्द नहीं होता, लेकिन मल त्याग करते समय चमकीले लाल रंग का खून दिखाई देना इसका प्रमुख संकेत हो सकता है। इसकी गंभीरता के आधार पर आंतरिक बवासीर को चार ग्रेड में बांटा जाता है।
ग्रेड 1 से ग्रेड 4 तक ऐसे बढ़ती है समस्या
ग्रेड 1 में बवासीर मलाशय के अंदर ही रहती है और बाहर दिखाई नहीं देती। ग्रेड 2 में मल त्याग के दौरान यह बाहर आ सकती है, लेकिन बाद में अपने आप अंदर चली जाती है। ग्रेड 3 में बाहर आने के बाद इसे हाथ से अंदर करना पड़ सकता है। वहीं ग्रेड 4 में बवासीर लगातार बाहर रह सकती है और उसे आसानी से अंदर नहीं किया जा सकता।
बाहरी बवासीर में दर्द और सूजन हो सकती है
बाहरी बवासीर गुदा के बाहर त्वचा के नीचे विकसित होती है। इसमें दर्द, सूजन, खुजली या गांठ महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में बवासीर के अंदर खून का थक्का बन जाता है। इसे थ्रॉम्बोस्ड एक्सटर्नल हेमोरॉयड कहा जाता है। ऐसी स्थिति में अचानक तेज दर्द और अधिक सूजन हो सकती है।
क्या बवासीर से मौत भी हो सकती है?
आम तौर पर सामान्य बवासीर को जानलेवा स्थिति नहीं माना जाता। हालांकि, लंबे समय तक या बार-बार होने वाली ब्लीडिंग शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया का कारण बन सकती है। बहुत ज्यादा और लगातार रक्तस्राव दुर्लभ परिस्थितियों में गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। इसलिए बवासीर के लक्षणों को लगातार नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
हर बार मल में खून बवासीर का संकेत नहीं
मल में खून दिखाई देने का कारण केवल बवासीर ही हो, यह जरूरी नहीं है। एनल फिशर, पॉलीप, आंतों में सूजन और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी अन्य स्थितियां भी रक्तस्राव का कारण बन सकती हैं। पहली बार खून आने, लगातार ब्लीडिंग होने, बिना वजह वजन घटने, मल त्याग की आदतों में बदलाव या एनीमिया जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
कब्ज और कम फाइबर बढ़ा सकते हैं बवासीर का जोखिम
कब्ज, मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना, लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठे रहना और भोजन में फाइबर की कमी बवासीर के जोखिम को बढ़ा सकती है। बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीना, फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खाना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना उपयोगी हो सकता है। कब्ज को लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय समय पर उसका समाधान करना भी जरूरी है।
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