US Iran Conflict : मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह युद्ध को लेकर एक बड़े फैसले के करीब हैं। Axios को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि उनके सामने अब यह विकल्प है कि ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की जाए या संघर्ष को खत्म करने के लिए दूसरे रास्ते तलाशे जाएं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अमेरिका को ईरान में जाकर उसे पूरी तरह तबाह करना चाहिए।
खाड़ी देशों के नेताओं से मुलाकात से पहले आया बयान
ट्रंप का यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान खाड़ी क्षेत्र के छह देशों के नेताओं के साथ प्रस्तावित बैठक से पहले आया है। इस बैठक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के प्रतिनिधियों के साथ युद्ध की स्थिति पर चर्चा होने की उम्मीद है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि क्षेत्रीय सहयोगियों की राय भी आगे की अमेरिकी रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर विकल्प खुले
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अगस्त में क्षेत्रीय सहयोगियों की चिंताओं के बाद बड़े सैन्य अभियान को आगे बढ़ाने से परहेज किया था। उस समय आशंका जताई गई थी कि ईरान जवाबी कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब और क्षेत्र के अन्य देशों में तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है। इसके बाद अमेरिका ने सैन्य दबाव के साथ आर्थिक प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकाबंदी पर ज्यादा जोर दिया।
साल के अंत तक अमेरिकी सेना को तैयार रहने का निर्देश
मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य क्षमता बनाए रखने की तैयारी जारी रखी है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों को साल के अंत तक मौजूदा स्तर पर तैयार रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पर्याप्त क्षमता उपलब्ध रहे। हालांकि, संघर्ष का अगला चरण अभी राष्ट्रपति के फैसले पर निर्भर बताया जा रहा है।
ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति
अमेरिका की रणनीति में सैन्य दबाव के साथ ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही ईरान पर व्यापक प्रतिबंध लागू कर रखे हैं। वहीं, अमेरिकी पक्ष का कहना है कि आर्थिक और समुद्री दबाव के कारण तेहरान पर समझौते के लिए दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से बातचीत और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अलग-अलग मांगें सामने आती रही हैं।
रूस और ईरान पर प्रतिबंध वाला विधेयक पास
इसी बीच अमेरिकी कांग्रेस ने रूस और ईरान पर नए एवं कड़े प्रतिबंधों से जुड़ा ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पारित कर दिया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इसे 262-159 के वोट से मंजूरी दी। इससे पहले सीनेट भी विधेयक को मंजूरी दे चुकी थी। अब इसे राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ का प्रावधान
इस कानून में रूस की ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले बड़े खरीदार देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालने का प्रावधान है। कानून ट्रंप को परिस्थितियों के अनुसार रूसी तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है। भारत और चीन समेत कई देशों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, टैरिफ लगाना अपने आप कानून लागू होते ही अनिवार्य नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रपति के निर्णय पर निर्भर करेगा।
ईरान युद्ध का अगला चरण अब ट्रंप के फैसले पर
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच एक तरफ संभावित बातचीत और दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला हुआ है। ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन आगे की रणनीति को लेकर निर्णायक चरण में है। वहीं रूस और ईरान के खिलाफ प्रतिबंध विधेयक के पारित होने से अमेरिका का आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में ट्रंप का फैसला युद्ध की दिशा और क्षेत्रीय कूटनीति दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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