NEET Success Story : सरगुजा जिले की आदिवासी बेटी कुमारी पूजा सिंह ने कठिन परिस्थितियों के बीच NEET-2026 में सफलता हासिल कर अपने डॉक्टर बनने के सपने को नई दिशा दी है। 66 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद पूजा ने लगातार मेहनत करते हुए मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त किया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली पूजा की मेडिकल शिक्षा में पैसों की कमी बाधा न बने, इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।
मुख्यमंत्री की पहल पर डीएमएफ से मिली ढाई लाख रुपये की सहायता
पूजा की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने जिला खनिज संस्थान न्यास यानी डीएमएफ मद से 2 लाख 50 हजार रुपये की सहायता स्वीकृत की है। यह राशि पूजा की मेडिकल शिक्षा से संबंधित शिक्षण शुल्क के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। शासन की इस सहायता से पूजा के परिवार को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
कलेक्टर ने पूजा की मेहनत को बताया प्रेरणादायक
कलेक्टर अजीत वसंत ने NEET में सफलता हासिल करने पर पूजा को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पूजा ने जिस मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के साथ सफलता हासिल की है, वह अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है। पूजा की उपलब्धि यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी के बावजूद लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास सफलता की राह खोल सकता है।
मजदूरी कर मां ने चलाया घर, बेटी ने पढ़ाई नहीं छोड़ी
पूजा सिंह सीतापुर विकासखंड के ग्राम राधापुर की रहने वाली हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। पूजा के पिता चक्रधर सिंह दूसरी शादी के बाद अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहते हैं। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण और बेटी की पढ़ाई की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उनकी मां के कंधों पर रही। मां के पास अपनी कृषि भूमि भी नहीं है और वह दूसरे लोगों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाती हैं।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर बनाया डॉक्टर बनने का लक्ष्य
पूजा ने अपनी शुरुआती शिक्षा राधापुर गांव में पूरी की। इसके बाद उन्होंने सीतापुर स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई की। उन्होंने वर्ष 2022 में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बड़े शहर में जाकर महंगी कोचिंग करना संभव नहीं था, लेकिन पूजा ने इसे अपने लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।
चार वर्षों तक घर पर रहकर NEET की तैयारी की
12वीं के बाद पूजा ने वर्ष 2022 से 2026 तक लगातार चार वर्षों तक घर पर रहकर NEET की तैयारी की। सीमित संसाधन, आर्थिक कठिनाइयां और 66 प्रतिशत दिव्यांगता भी उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सकीं। उन्होंने नियमित अध्ययन और आत्मविश्वास के साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी जारी रखी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने NEET-2026 में सफलता हासिल कर ली।
मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश से पूरा हुआ सपना
NEET में सफलता के बाद काउंसलिंग के माध्यम से पूजा को मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश मिला। एक मजदूर मां की बेटी का सीमित संसाधनों के बीच मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना परिवार और सरगुजा जिले के लिए उपलब्धि का विषय है। अब शासन से मिली आर्थिक सहायता के बाद उनकी मेडिकल शिक्षा को आगे बढ़ाने की राह भी आसान हुई है।
पूजा की सफलता बनी संघर्ष कर रहे विद्यार्थियों के लिए मिसाल
पूजा की कहानी संघर्ष, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल पेश करती है। एक तरफ मां ने मजदूरी कर परिवार संभाला, वहीं बेटी ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई जारी रखी। अब शासन की आर्थिक मदद ने उनके डॉक्टर बनने के सपने को अतिरिक्त सहारा दिया है। पूजा की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य का सपना देखते हैं।
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