Pakistan Army Surrender: पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में शनिवार को नागरिक अधिकारों की मांग को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं ने शहर की बदहाल बुनियादी सुविधाओं और प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सिंध असेंबली का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा विशेष रूप से शहर की जर्जर सड़कों और पूरी तरह से ठप हो चुकी ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर था। जैसे ही मार्च असेंबली के करीब पहुँचा, पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। इस टकराव ने कराची के रेड जोन को रणक्षेत्र में तब्दील कर दिया, जिससे पूरे महानगर में सुरक्षा संबंधी तनाव पैदा हो गया है।
‘जीने दो कराची को’ अभियान: क्या हैं प्रमुख मांगें?
जमात-ए-इस्लामी द्वारा आयोजित इस विशाल मार्च का मुख्य नारा ‘जीने दो कराची को’ था। इस अभियान के जरिए पार्टी ने सरकार के सामने यह बात रखी कि कराची जैसा आर्थिक केंद्र आज बुनियादी नागरिक अधिकारों के लिए तरस रहा है। कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगों में स्थानीय निकाय व्यवस्था को संवैधानिक रूप से मजबूत करना, सीवेज की समस्या का स्थायी समाधान और टूटी हुई सड़कों का तत्काल पुनर्निर्माण शामिल है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सिंध सरकार कराची से भारी राजस्व वसूलती है, लेकिन विकास के नाम पर शहर को नजरअंदाज कर दिया गया है।
पुलिसिया कार्रवाई और लाठीचार्ज: हिरासत में कई कार्यकर्ता
जैसे ही प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने सुरक्षा घेरा तोड़कर असेंबली की ओर बढ़ने का प्रयास किया, पुलिस ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और बेरहमी से लाठीचार्ज किया। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने रेड जोन में घुसने की कोशिश की और पुलिस पर पथराव किया, जिससे बल प्रयोग अनिवार्य हो गया। इस हिंसक झड़प में पार्टी के कम से कम 10 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, पुलिस ने प्रदर्शन में इस्तेमाल हो रहे साउंड सिस्टम और अन्य प्रचार सामग्री को भी जब्त कर लिया है। इस संघर्ष में कई कार्यकर्ताओं और कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं।
सिंध सरकार का आधिकारिक बयान और चेतावनी
घटना के बाद सिंध के सूचना मंत्री ने प्रेस वार्ता के दौरान सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी थी, लेकिन कार्यकर्ताओं ने कानून की सीमाओं का उल्लंघन किया। मंत्री ने कहा कि रेड जोन में प्रवेश वर्जित है और चेतावनी के बावजूद भीड़ ने वहां घुसने की कोशिश की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शहर की शांति और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में भी ऐसी किसी भी कोशिश के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लोकतंत्र पर प्रहार: विपक्ष ने जताई कड़ी नाराजगी
जमात-ए-इस्लामी के कराची अध्यक्ष मुनीम जफर ने पुलिस की इस कार्रवाई को ‘फासीवादी’ करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के लिए आवाज उठाने का लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसे पुलिस के दम पर दबाया जा रहा है। जफर ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बातचीत का कोई रास्ता नहीं छोड़ा और जब प्रदर्शनकारी अपनी बात रखने आए, तो उन पर हमला कर दिया गया। उन्होंने ऐलान किया कि गिरफ्तारी और लाठियों के बावजूद उनका यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कराची के लोगों को उनके हक नहीं मिल जाते।
समाधान की प्रतीक्षा में कराची की जनता
फिलहाल कराची के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि दोबारा ऐसी हिंसक स्थिति उत्पन्न न हो। हालांकि शहर में तनाव अभी भी बरकरार है। कराची की जनता अब इस राजनीतिक गतिरोध के बीच फंसी हुई है, जहाँ एक ओर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव है, तो दूसरी ओर शहर की समस्याएं—जैसे जलभराव और टूटी सड़कें—दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सिंध सरकार इस दबाव के बाद विकास कार्यों में तेजी लाती है या दमन की नीति जारी रहती है।
















