Chaitram Atami: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में विकास और विश्वास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। कभी घोर नक्सल प्रभावित और प्रशासनिक दृष्टि से ‘अंधेरे’ में रहा बैलाडीला पहाड़ियों के पीछे बसा लावा-पुरेंगल इलाका अब मुख्यधारा से जुड़ रहा है। इस ऐतिहासिक बदलाव की तस्वीर तब साफ हुई जब दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी और जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल ने प्रशासनिक अमले के साथ इस क्षेत्र का दौरा किया। हैरानी और गर्व की बात यह है कि इस टीम ने करीब 10 किलोमीटर का पथरीला और दुर्गम पहाड़ी रास्ता पैदल तय किया ताकि वे उन ग्रामीणों तक पहुंच सकें, जिन्होंने आजादी के बाद से अब तक किसी जनप्रतिनिधि का चेहरा नहीं देखा था।
आजादी के बाद पहली बार गांव पहुंचा कोई विधायक
लावा-पुरेंगल के ग्रामीणों के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं था। स्थानीय लोगों के अनुसार, आजादी के सात दशकों के बाद यह पहला मौका है जब कोई विधायक या वरिष्ठ अधिकारी उनके द्वार तक पहुंचा है। यह क्षेत्र लंबे समय तक माओवादी प्रभाव के कारण ‘नो-गो ज़ोन’ बना हुआ था, जहां शासन-प्रशासन की पहुंच शून्य थी। विधायक चैतराम अटामी ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पारंपरिक लूंगी पहनकर ग्रामीणों से मुलाकात की। इस सादगी ने स्थानीय लोगों के मन में प्रशासन के प्रति वर्षों से जमी बर्फ को पिघलाने और विश्वास का माहौल बनाने में मदद की।
मौके पर समाधान: विकास कार्यों का हुआ भूमिपूजन
जनप्रतिनिधियों ने केवल दौरा ही नहीं किया, बल्कि ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। पेयजल की गंभीर समस्या को देखते हुए तत्काल हैंडपंप स्थापना, आवागमन के लिए सड़क निर्माण और बच्चों के लिए आंगनबाड़ी भवन जैसे महत्वपूर्ण विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। इस दौरान जरूरतमंद परिवारों को दैनिक उपयोग की सामग्री जैसे कपड़े और बर्तन बांटे गए, जबकि बच्चों को किताबें और शैक्षणिक किट प्रदान की गई। अधिकारियों ने मौके पर ही विभिन्न योजनाओं के लिए सर्वे कर त्वरित स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कर दी।
बदलते सुरक्षा हालात और नक्सलियों का पीछे हटना
जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल ने इस मौके पर कहा कि लावा-पुरेंगल जैसे अंदरूनी क्षेत्रों में पहुंचना पहले सुरक्षा कारणों से असंभव था। हालांकि, पिछले एक वर्ष में छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए व्यापक नक्सल विरोधी अभियानों ने तस्वीर बदल दी है। बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण और मुठभेड़ों में उनके सफाए के कारण अब सुरक्षा स्थिति मजबूत हुई है। यह पैदल यात्रा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अब बंदूक का डर खत्म हो रहा है और विकास की रोशनी अंतिम छोर तक पहुंच रही है।
भय की छाया से बाहर निकलकर विकास की ओर कदम
लावा-पुरेंगल में जनप्रतिनिधियों का पहुंचना केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि उस भरोसे की वापसी है जो दशकों तक हिंसा की छाया में दबा रहा। ग्रामीण अब पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद कर रहे हैं। विधायक की इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दुर्गम पहाड़ों को पार कर जनता के साथ खड़ी है। संवाद और विश्वास की यह नई शुरुआत दंतेवाड़ा के नक्सल मुक्त भविष्य की ओर एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
















