Hathras Defamation Case: उत्तर प्रदेश के हाथरस के चर्चित बूलगढ़ी मामले से जुड़े एक बयान को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस मामले में उन्हें अदालत की ओर से नोटिस जारी किया गया है। मामला 2020 की घटना से जुड़े एक बयान को लेकर दाखिल आपराधिक मानहानि शिकायत से संबंधित है। शिकायत खारिज किए जाने के बाद अब शिकायतकर्ता पक्ष ने निचली अदालत के आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी है।
13 मई के आदेश के खिलाफ दाखिल हुई रिवीजन याचिका
राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल शिकायत को एमपी-एमएलए कोर्ट ने 13 मई 2026 को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से जिला अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल की गई। जुलाई में अदालत ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया और राहुल गांधी को नोटिस जारी किया। अब इसी रिवीजन याचिका पर आगे की सुनवाई होनी है।
शनिवार को नहीं हो सकी मामले की सुनवाई
शिकायतकर्ताओं के वकील मुन्ना सिंह पुंधीर के मुताबिक, मामले में शनिवार को सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन न्यायिक अधिकारी के अदालत में मौजूद नहीं होने के कारण कार्यवाही नहीं हो सकी। अब अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। वकील के अनुसार, पिछली सुनवाई में राहुल गांधी को जारी नोटिस की तामील स्वीकार की जा चुकी थी।
2024 में बूलगढ़ी गांव पहुंचे थे राहुल गांधी
यह विवाद राहुल गांधी के 12 दिसंबर 2024 को हाथरस के बूलगढ़ी गांव के दौरे के दौरान दिए गए कथित बयान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि उस दौरान राहुल गांधी ने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे मामले में बरी किए जा चुके तीन लोगों की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने उन्हें बलात्कार के आरोपी के रूप में पेश किया, जबकि अदालत उन्हें पहले ही बरी कर चुकी थी।
शिकायतकर्ताओं ने मानहानि का लगाया आरोप
शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, राहुल गांधी के बयान के बाद पहले उन्हें कानूनी नोटिस भेजा गया था और कथित तौर पर 1.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई थी। इसके बाद आपराधिक मानहानि की शिकायत अदालत में दाखिल की गई। हालांकि, यह शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है और इस मामले में अदालत की ओर से अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
2020 की घटना के बाद देशभर में हुई थी चर्चा
सितंबर 2020 में हाथरस के बूलगढ़ी गांव की 19 वर्षीय दलित युवती पर कथित सामूहिक दुष्कर्म और हमले का मामला सामने आया था। बाद में दिल्ली के अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मामले में चार पुरुषों पर आरोप लगाए गए थे। ट्रायल के बाद तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया, जबकि एक आरोपी को दोषी ठहराया गया और वह जेल में है। हाथरस मामले पर अदालत की कार्यवाही और पीड़िता के परिवार की स्थिति को लेकर समय-समय पर कानूनी घटनाक्रम सामने आते रहे हैं।
निचली अदालत ने शिकायत क्यों खारिज की थी
13 मई को शिकायत खारिज करते हुए निचली अदालत ने कहा था कि राहुल गांधी के कथन का संदर्भ सरकार की घोषणाओं और नीतियों की आलोचना या टिप्पणी से जुड़ा दिखाई देता है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों में किसी विशेष व्यक्ति को बदनाम करने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से सामने नहीं आने की बात कही थी। अब शिकायतकर्ता पक्ष इसी आदेश को रिवीजन के जरिए चुनौती दे रहा है।
15 अक्टूबर को तय होगा आगे की सुनवाई का रुख
फिलहाल मामला रिवीजन स्तर पर है और अदालत ने राहुल गांधी को जारी नोटिस के बाद अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की है। उस दिन शिकायतकर्ता पक्ष अपनी दलीलें रख सकता है और निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है। मामले में अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
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