India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन अगले सप्ताह अमेरिका के महत्वपूर्ण दौरे पर जाने वाले हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य 7 फरवरी को दोनों देशों द्वारा जारी किए गए संयुक्त बयान के आधार पर ‘अंतरिम व्यापार समझौते’ (Interim Trade Deal) के कानूनी ढांचे को अंतिम रूप देना है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों देश अब इस समझौते को एक औपचारिक और बाध्यकारी कानूनी दस्तावेज में बदलने की प्रक्रिया में हैं।
भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत: रेसिप्रोकल टैरिफ में कटौती की उम्मीद
इस समझौते के तहत भारतीय सामानों पर लगने वाले भारी-भरकम करों में बड़ी कटौती की संभावना है। राजेश अग्रवाल के अनुसार, अमेरिका भारत से आने वाले उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की तैयारी कर चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस संबंध में आधिकारिक घोषणा इसी सप्ताह हो सकती है। यह कटौती भारतीय निर्यातकों, विशेषकर लघु और मध्यम उद्योगों के लिए वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने का एक सुनहरा अवसर साबित होगी।
मार्च तक समझौते पर हस्ताक्षर का लक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया
सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए जाएं। मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन की टीम अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठकर उन तकनीकी और कानूनी पेचीदगियों को सुलझाएगी जो वर्तमान में मसौदे का हिस्सा हैं। हालांकि, अभी किसी निश्चित तारीख की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन वार्ता की गति को देखते हुए इसे जल्द पूरा करने की कोशिश की जा रही है। यदि इस सप्ताह टैरिफ कटौती पर फैसला नहीं होता है, तो भारतीय दल अगले सप्ताह वाशिंगटन में इस देरी के कारणों और समाधान पर सीधी चर्चा करेगा।
रूस से तेल खरीद पर लगे दंड और जीरो टैरिफ की स्थिति
भारत की कूटनीतिक जीत का एक बड़ा प्रमाण यह है कि 27 अगस्त से भारतीय सामान पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ (जो रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया था) अब हटा लिया गया है। राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि कुछ विशिष्ट श्रेणियों के उत्पादों पर टैरिफ को ‘जीरो’ (0%) तक लाया जा सकता है, जिससे भारतीय सामान अमेरिकी बाजारों में और भी सस्ते होंगे। हालांकि, यह ‘जीरो टैरिफ’ सुविधा और बाजार तक पहुंच के अन्य लाभ तभी लागू होंगे जब दोनों देश कानूनी समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर देंगे।
7 फरवरी का संयुक्त बयान: एक साल की कड़ी मेहनत का परिणाम
यह समझौता रातों-रात संभव नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे एक साल की लंबी और जटिल वार्ता रही है। 7 फरवरी को जारी संयुक्त बयान में इस फ्रेमवर्क की नींव रखी गई थी, जिसमें अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर सीधे 18 प्रतिशत तक लाने और चुनिंदा उत्पादों पर ड्यूटी खत्म करने की बात कही गई थी। भारत ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह टैरिफ में कोई भी कटौती या बाजार में अतिरिक्त रियायत तभी देगा, जब यह समझौता कानूनी रूप से संपन्न हो जाएगा।
पीयूष गोयल का दृष्टिकोण: 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार में भारत की दस्तक
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस विकास को ‘ऐतिहासिक और संतुलित’ करार दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका जैसी 30 ट्रिलियन डॉलर की विशाल अर्थव्यवस्था में भारतीय निर्यात के लिए दरवाजे खुलने से देश के किसानों, मछुआरों, युवाओं और महिला उद्यमियों को सीधा लाभ पहुंचेगा। यह समझौता न केवल भारत की आर्थिक विकास दर को गति देगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ उत्पादों के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजार में एक स्थायी स्थान सुनिश्चित करेगा।
















