ONGC Gas Discovery : सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) को महानदी बेसिन के गहरे समुद्री क्षेत्र में गैस की महत्वपूर्ण खोज मिली है। कंपनी के मुताबिक, उसके मौजूदा डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन अभियान के तहत खोदे गए पहले कुएं MDW-28 से परीक्षण के दौरान उत्साहजनक दर से गैस का प्रवाह दर्ज किया गया। साथ ही रिजर्वायर प्रेशर भी स्थिर और मजबूत पाया गया है, जिसे संभावित व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
25 जुलाई को शुरू हुआ था डीपवॉटर अभियान
महानदी बेसिन में ONGC का यह डीपवॉटर अभियान 25 जुलाई 2026 को शुरू किया गया था। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत महानदी बेसिन के गहरे अपतटीय क्षेत्र में MDW-28 यानी MN-DW18-1-H-D कुएं की ड्रिलिंग शुरू की गई। यह अभियान केंद्र सरकार के ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम के तहत शुरू की गई पहल का हिस्सा है।
MDW-28 कुएं से मिला उत्साहजनक परिणाम
ONGC ने बताया कि ड्रिलिंग के बाद भू-वैज्ञानिक और सब-सर्फेस डेटा का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इस अध्ययन के आधार पर 18 सितंबर 2026 को कुएं में परफोरेशन का कार्य पूरा किया गया। इसके बाद किए गए परीक्षण में कुएं से अच्छी मात्रा में गैस का प्रवाह सामने आया। परीक्षण के दौरान रिजर्वायर का दबाव भी स्वस्थ स्तर पर दर्ज किया गया, जिससे इस खोज की संभावित उपयोगिता को लेकर उम्मीद बढ़ी है।
व्यावसायिक उत्पादन की संभावनाओं पर नजर
कंपनी के अनुसार गैस का प्रवाह और रिजर्वायर प्रेशर दोनों ही सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। हालांकि, किसी खोज को व्यावसायिक उत्पादन में बदलने से पहले उससे जुड़े तकनीकी और आर्थिक पहलुओं का विस्तृत आकलन जरूरी होता है। महानदी बेसिन में पहले से मौजूद अन्य खोजों के साथ इस संसाधन को विकसित करने की संभावनाओं पर भी कंपनी आगे काम करेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों ने ड्रिलशिप का किया दौरा
ड्रिलिंग अभियान के दौरान ONGC के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर टीम का उत्साह बढ़ाया। कंपनी के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह, डायरेक्टर टेक्नोलॉजी एंड फील्ड सर्विसेज विक्रम सक्सेना और डायरेक्टर एक्सप्लोरेशन ओ.पी. सिन्हा ने ड्रिलशिप का दौरा किया। इस दौरान अधिकारियों ने अभियान से जुड़े कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और परियोजना में शामिल टीम के प्रयासों की सराहना की।
साझा इंफ्रास्ट्रक्चर से विकास की योजना
ONGC का कहना है कि महानदी क्षेत्र में हुई अन्य खोजों के साथ इस गैस संसाधन को भी PNG Rules 2025 के तहत उपलब्ध साझा इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। साझा ढांचे के इस्तेमाल से गहरे समुद्री क्षेत्रों में खोजे गए संसाधनों को उत्पादन व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिल सकती है। इससे नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों के विकास की प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना है।
डीप और अल्ट्रा-डीपवॉटर में जारी रहेगी खोज
ONGC ने साफ किया है कि वह देश के गहरे और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की तलाश जारी रखेगी। कंपनी इन क्षेत्रों को भारत के ऊर्जा संसाधनों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मानती है। समुद्र में मौजूद संभावित तेल और गैस भंडार की खोज के जरिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम
महानदी बेसिन में गैस की यह खोज भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। घरेलू स्तर पर तेल और गैस संसाधनों की खोज बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, इस खोज से वास्तविक उत्पादन और आर्थिक लाभ कितना होगा, यह आगे होने वाले मूल्यांकन और विकास कार्यों पर निर्भर करेगा।
समुद्री संसाधनों से ऊर्जा क्षेत्र को नई उम्मीद
महानदी बेसिन में ONGC का यह अभियान देश के अपतटीय ऊर्जा संसाधनों की क्षमता को सामने लाता है। कंपनी आने वाले समय में डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में खोज गतिविधियों को आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। ONGC के अनुसार, ऐसी खोजें भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में योगदान दे सकती हैं।
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