Moringa Farming : आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग अपनी सेहत और खान-पान को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो गए हैं। यही वजह है कि पोषक तत्वों से भरपूर चीजों की मांग लगातार बढ़ रही है। अगर आप भी महंगे सुपरफूड खरीदने के बजाय घर पर ही कोई पौष्टिक विकल्प उगाना चाहते हैं, तो सहजन यानी मोरिंगा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसकी पत्तियों और फलियों का इस्तेमाल कई तरह के व्यंजनों में किया जाता है।
छोटे गमले और ग्रो बैग में भी उगा सकते हैं मोरिंगा
आमतौर पर लोगों को लगता है कि सहजन का पेड़ लगाने के लिए बड़े खेत या पर्याप्त जमीन की जरूरत होती है। हालांकि, इसे बड़े गमले या ग्रो बैग में भी उगाया जा सकता है। घर की बालकनी, छत या उपलब्ध छोटी जगह में इसकी खेती शुरू की जा सकती है। सही गमले और उचित देखभाल के साथ पौधे को अच्छी ग्रोथ मिल सकती है।
मजबूत गमला चुनें और मिट्टी को इस तरह तैयार करें
मोरिंगा लगाने के लिए ऐसा बड़ा और मजबूत गमला चुनना चाहिए, जिसके नीचे पानी की निकासी के लिए पर्याप्त छेद मौजूद हों। इससे अतिरिक्त पानी बाहर निकलता रहेगा और जड़ों में पानी जमा होने की समस्या कम होगी। मिट्टी तैयार करने के लिए सामान्य मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद और थोड़ी बालू मिलाई जा सकती है। इससे मिट्टी भुरभुरी और पौधे के लिए अनुकूल बनती है।
बीज या कटिंग से तैयार कर सकते हैं सहजन का पौधा
सहजन को घर पर बीज या कटिंग, दोनों तरीकों से उगाया जा सकता है। बीज उपलब्ध होने पर उन्हें तैयार मिट्टी में लगाया जा सकता है। वहीं नर्सरी से स्वस्थ कटिंग लाकर भी गमले में पौधा तैयार किया जा सकता है। पौधे को ऐसी जगह रखना जरूरी है, जहां रोजाना करीब पांच से छह घंटे तक पर्याप्त धूप मिल सके।
पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए प्रूनिंग बेहद जरूरी
गमले में सहजन का पौधा जब करीब दो से तीन फीट ऊंचा हो जाए, तब उसकी हल्की प्रूनिंग की जा सकती है। ऊपर की टहनी को थोड़ा काटने से पौधे की बढ़त सिर्फ ऊंचाई की तरफ नहीं होती, बल्कि आसपास नई शाखाएं निकलने लगती हैं। इससे पौधा ज्यादा घना और झाड़ीनुमा बन सकता है। अधिक शाखाएं होने से पत्तियों की संख्या भी बढ़ सकती है।
जरूरत के हिसाब से ही दें पौधे को पानी
मोरिंगा के पौधे को लगातार ज्यादा पानी देने की जरूरत नहीं होती। गमले की मिट्टी सूखने पर ही पानी देना बेहतर रहता है। यदि मिट्टी में लगातार पानी जमा रहता है, तो जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और पौधे की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है। इसलिए गमले में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखना बेहद जरूरी है।
जैविक देखभाल के लिए नीम खली का कर सकते हैं इस्तेमाल
पौधे की देखभाल के दौरान मिट्टी में समय-समय पर जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। नीम खली की सीमित मात्रा पौधे की मिट्टी को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है। साथ ही पौधे में किसी तरह के कीड़े या फंगल समस्या के संकेत दिखाई दें, तो समय रहते उचित जैविक या बागवानी उपाय अपनाना चाहिए।
सहजन की पत्तियों और फलियों का होता है इस्तेमाल
सहजन की पत्तियां और फलियां भारतीय खान-पान में लंबे समय से इस्तेमाल होती रही हैं। इसकी पत्तियों से सब्जी, सूप और अन्य व्यंजन बनाए जाते हैं। इन्हें सुखाकर पाउडर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। सहजन में कैल्शियम, आयरन और कई विटामिन तथा एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं, लेकिन इसे किसी बीमारी की दवा या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
घर की छोटी जगह से शुरू हो सकता है कमाई का जरिया
अगर आपके पास अतिरिक्त जगह है और आप कई गमलों में सहजन के पौधे तैयार करते हैं, तो आगे चलकर इससे कमाई की संभावना भी तलाश सकते हैं। ताजी पत्तियों और मोरिंगा पाउडर की मांग कुछ बाजारों में रहती है। हालांकि, बिक्री शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार, गुणवत्ता, प्रसंस्करण और मांग की जानकारी जुटाना जरूरी है। इस तरह सहजन की बागवानी घर की हरियाली के साथ अतिरिक्त आय का विकल्प भी बन सकती है।
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