Iran News : ईरान के दक्षिणपूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों और सशस्त्र समूहों के बीच हुई कार्रवाई के दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी IRGC के वरिष्ठ कमांडर ब्रिगेडियर जनरल हुसैन जारिफी की मौत हो गई। ईरान की अर्ध-सरकारी तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, जारिफी सरावान स्थित शाहिद सज्जाद ऑपरेशनल मुख्यालय के कमांडर थे। IRGC ग्राउंड फोर्स के कुद्स बेस ने भी उनकी मौत की पुष्टि की है।
सरावान में सशस्त्र समूह के खिलाफ चलाया गया ऑपरेशन
रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई सरावान के जहादाबाद इलाके में की गई, जहां सुरक्षा बलों को एक सशस्त्र समूह के मौजूद होने की जानकारी मिली थी। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, संयुक्त सुरक्षा अभियान के दौरान IRGC, खुफिया मंत्रालय और पुलिस बलों ने संदिग्ध ठिकाने को निशाना बनाया। इसके बाद सुरक्षा बलों और हथियारबंद लोगों के बीच मुठभेड़ हुई। हालांकि, अभियान की पूरी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
पांच सशस्त्र सदस्य मारे जाने का दावा
IRGC की ओर से कहा गया है कि अभियान के दौरान सशस्त्र समूह के पांच सदस्य मारे गए, जबकि कई अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया। ईरानी सुरक्षा बलों ने इन लोगों को आतंकवादी या सशस्त्र समूह का सदस्य बताया है, लेकिन किसी विशिष्ट संगठन का नाम आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया। इसलिए इस कार्रवाई में मारे गए लोगों की पहचान और संगठनात्मक संबद्धता को लेकर स्वतंत्र जानकारी सीमित है।
13 सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की रिपोर्ट
इस अभियान को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में सुरक्षा बलों के नुकसान का भी जिक्र किया गया है। ईरान इंटरनेशनल ने बलोच अधिकार संगठन हालवश के हवाले से बताया कि कार्रवाई में कम से कम 13 सुरक्षा कर्मी गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कुछ अन्य रिपोर्टों में भी सरावान में कई घंटे तक चली झड़प और सुरक्षा बलों के हताहत होने की बात कही गई है।
पाकिस्तान सीमा के करीब है सरावान
सरावान ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तान की सीमा के नजदीक स्थित है। यह इलाका लंबे समय से ईरानी सुरक्षा बलों और विभिन्न सशस्त्र समूहों के बीच संघर्ष का केंद्र रहा है। प्रांत की भौगोलिक स्थिति और सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां समय-समय पर सुरक्षा अभियान और हिंसक घटनाएं सामने आती रही हैं। क्षेत्र में सक्रिय समूहों को लेकर ईरानी अधिकारियों और स्वतंत्र स्रोतों के दावों में अंतर भी देखा जाता है।
12 सितंबर को भी हुई थी बड़ी सुरक्षा कार्रवाई
सरावान में यह घटना हाल के दिनों में हुई दूसरी बड़ी सुरक्षा कार्रवाई के बाद सामने आई है। 12 सितंबर को IRGC ने एक अभियान में चार संदिग्ध आतंकवादियों और तीन ईरानी खुफिया एवं सुरक्षा कर्मियों के मारे जाने की जानकारी दी थी। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, उस कार्रवाई में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक भी बरामद किए गए थे। उस अभियान को भी सिस्तान-बलूचिस्तान में सक्रिय सशस्त्र समूह के खिलाफ कार्रवाई बताया गया था।
जारिफी ने एक दशक से अधिक समय तक की सेवा
IRGC से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, हुसैन जारिफी ने सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में एक दशक से अधिक समय तक सेवा की थी। उनकी मौत के बाद ईरानी सुरक्षा प्रतिष्ठान की ओर से उन्हें अभियान के दौरान अग्रिम मोर्चे पर सक्रिय कमांडर के रूप में याद किया गया। IRGC ने कहा है कि उनकी मौत के बावजूद क्षेत्र में सुरक्षा अभियानों पर असर नहीं पड़ेगा और सीमा सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियां जारी रहेंगी।
25 सितंबर को सरावान में होगा अंतिम संस्कार
हुसैन जारिफी के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम शुक्रवार, 25 सितंबर को सरावान में रखा गया है। उनकी मौत ऐसे समय हुई है जब सिस्तान-बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों और सशस्त्र समूहों के बीच तनाव बना हुआ है। ताजा घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान सीमा से सटे इस ईरानी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और वहां जारी अभियानों को अंतरराष्ट्रीय ध्यान में ला दिया है।
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