Terrorist Nijjar: कनाडाई मीडिया संस्थानों द्वारा खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के लिए ‘सिख नेता’ जैसे सम्मानजनक शब्दों का उपयोग करने पर एक नई वैश्विक रिपोर्ट ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ‘खालसा वॉक्स’ द्वारा जारी इस विस्तृत रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि आतंकवाद को किसी विशेष धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान के साथ जोड़कर पेश करना वैश्विक समाज के लिए एक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मीडिया की यह विवादास्पद प्रस्तुति न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को धुंधला करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उग्रवाद और आतंकवाद के विरुद्ध जारी सामूहिक लड़ाई को भी भीतर से खोखला और कमजोर बनाती है।
शब्दों की बाजीगरी और सच्चाई: एक घोषित आतंकी की गलत छवि
जून 2023 में कनाडा के सरे स्थित एक गुरुद्वारे के बाहर मारे गए हरदीप सिंह निज्जर को भारत सहित दुनिया के कई सुरक्षा तंत्र एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नामित आतंकी और हिंसक अलगाववादी साजिशों के मुख्य सूत्रधार के रूप में देखते रहे हैं। इसके विपरीत, कनाडाई मीडिया संस्थान ‘ग्लोबल न्यूज’ ने उसे लगातार “बी.सी. (ब्रिटिश कोलंबिया) सिख नेता” के रूप में संबोधित किया है। ‘खालसा वॉक्स’ के अनुसार, यह पत्रकारिता के मानकों का उल्लंघन और तथ्यों को मिटाने का एक जानबूझकर किया गया खतरनाक प्रयास है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यह केवल शब्दों का चयन नहीं है, बल्कि एक हिंसक उग्रवादी को पूरे समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करने की एक सोची-समझी कोशिश है।
कट्टरपंथ को खाद-पानी: मीडिया फ्रेमिंग और युवाओं पर प्रभाव
रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा किया गया है कि निज्जर के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के साथ संबंधों और हथियारों के गुप्त प्रशिक्षण शिविरों के संचालन से जुड़े गंभीर आरोपों को कनाडाई मीडिया ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। उसे केवल सिख अधिकारों के रक्षक के रूप में पेश करने से प्रवासी समुदायों के युवाओं के मन में कट्टरपंथी विचारधारा के प्रति आकर्षण पैदा हो सकता है। यह नैरेटिव न केवल आतंकवाद के वास्तविक पीड़ितों का अपमान है, बल्कि यह अपराधियों को एक ‘निर्दोष पीड़ित’ के रूप में महिमामंडित करने का एक गलत और समाज-विरोधी उदाहरण भी पेश करता है।
अलगाववाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई पर प्रहार
पंजाब में निज्जर के संगठन ‘खालिस्तान टाइगर फोर्स’ द्वारा फैलाई गई हिंसा और निर्दोषों की हत्याओं की आवाज को इस नए कनाडाई नैरेटिव में पूरी तरह दबा दिया गया है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि जब सांस्कृतिक पहचान के आवरण में आतंकवादियों को “नेता” का दर्जा दिया जाता है, तो अलगाववाद के खिलाफ दुनिया की एकजुटता खंडित हो जाती है। चाहे वह दक्षिणपंथी उग्रवाद हो या सीमा पार से संचालित अलगाववादी हिंसा, मीडिया का प्राथमिक धर्म तथ्यों को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ जनता के सामने रखना है, न कि किसी एजेंडे के तहत उग्रवाद का बचाव करना।
कनाडा का इतिहास और कनिष्क त्रासदी से सीख
रिपोर्ट में कनाडा सरकार और वहां के मीडिया को उनके काले इतिहास की याद दिलाई गई है। सिख उग्रवाद की जड़ों और एयर इंडिया की ‘कनिष्क’ त्रासदी जैसी भीषण घटनाओं को एक चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। रिपोर्ट ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति की आतंकी गतिविधियों का उल्लेख करते समय साक्ष्यों को प्राथमिकता दें। सरकारों को भी सलाह दी गई है कि वे राजनीतिक लाभ के लिए आतंकियों को समर्थन देने के बजाय उग्रवाद के खिलाफ एक समान और कठोर मापदंड अपनाएं। यदि तथ्यों के साथ समझौता जारी रहा, तो यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय मूल्यों के लिए एक अपूरणीय संकट बन जाएगा।
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